सूखे की रोकथाम के लिए दुनिया बदले रणनीति लचीलेपन पर जोर: भूपेंद्र यादव

यूएनसीसीडी के कॉप 17 में वैश्विक स्तर पर सूखे से निपटने के लिए भारत ने रखी अपनी बात

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नई दिल्ली। भारत ने संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम कन्वेंशन (यूएनसीसीडी) के कॉप 17 में वैश्विक स्तर पर सूखे से निपटने की रणनीति में बदलाव की अपील की है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सूखे को बार-बार आने वाली आपदा मानकर केवल राहत देने के बजाय इसे एक पूर्वानुमानित और रोके जा सकने वाले जोखिम के रूप में देखा जाना चाहिए।

मंगोलिया के उलानबातर में आयोजित ‘सूखे से निपटने के लिए उपायों को तेज़ करने’ विषयक मंत्रिस्तरीय संवाद को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि सूखा अब केवल एक मौसमी घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह जल सुरक्षा, खाद्य व्यवस्था, जैव विविधता और आर्थिक स्थिरता के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। उन्होंने कहा कि वैश्विक लक्ष्य “प्रतिक्रिया से पहले तैयारी, संकट प्रबंधन से पहले रोकथाम और पुनर्बहाली से पहले लचीलापन” होना चाहिए।

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मंत्री ने बताया कि भारत सूखे से निपटने के लिए वर्षा निगरानी, सैटेलाइट आधारित सूखा आकलन, शुरुआती चेतावनी और केंद्र-राज्य स्तर पर समन्वित तैयारी पर काम कर रहा है। इसका उद्देश्य सूखे की स्थिति को संकट में बदलने से पहले ही आवश्यक कदम उठाना है।

उन्होंने जल और भूमि के बीच संबंध पर जोर देते हुए कहा कि वनों और जलग्रहण क्षेत्रों का संरक्षण पानी की उपलब्धता बढ़ाने, मिट्टी के कटाव को कम करने और भूजल पुनर्भरण में मदद करता है। भारत में नदी पुनर्जीवन, पारंपरिक जल निकायों के संरक्षण और जल संरक्षण की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

यादव ने बताया कि भारत के विभिन्न हिस्सों में समुदायों की भागीदारी से झरनों और जल पुनर्भरण क्षेत्रों का संरक्षण किया जा रहा है। वहीं, वर्षा आधारित और खराब हो चुकी कृषि भूमि के लिए देशभर में वाटरशेड कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

किसानों को सूखे समेत अन्य जोखिमों से सुरक्षा देने के लिए फसल बीमा को भी महत्वपूर्ण उपाय बताया गया। इसके अलावा पेयजल आपूर्ति, रोजगार, चारा और आपातकालीन जल व्यवस्था जैसे उपायों के जरिए संकट के दौरान कमजोर वर्गों को सहायता दी जाती है।

भारत ने दुनिया से पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली, मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और समन्वित कार्रवाई में अधिक निवेश करने का आह्वान किया। यादव ने कहा कि दुनिया के सबसे कमजोर वर्गों के लिए सूखा लचीलापन तैयार करना केवल विकल्प नहीं, बल्कि जीवित रहने की आवश्यकता है। उन्होंने सूखे से निपटने के क्षेत्र में भारत के अनुभव और क्षमताओं, विशेषकर प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को वैश्विक समुदाय के साथ साझा करने की प्रतिबद्धता भी जताई।

लेखक के बारे में

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हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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