इंतजार खत्म! OTT पर रिलीज हुई दिलजीत दोसांझ की पंजाब 95'
पंजाब 95' : 'पंजाब 95' की रिलीज में सेंसरशिप के कारण देरी होने से काफी हलचल थी। आखिरकार ये फिल्म आज, 03 जुलाई 2026 को ओटीटी प्लेटफॉर्म Zee5 पर रिलीज हो गई। शाम 6 बजे साइलेंट ड्रॉप के साथ ही दिलजीत की यह नई फिल्म फिर से चर्चा आ गई है। फिल्म 'पंजाब 95' का नाम बदलकर अब 'सतलुज' कर दिया गया है। हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ, अर्जुन रामपाल, कंवलजीत सिंह, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओल्यान मुख्य भूमिकाओं में हैं। इसका ट्रेलर देखने के बाद से ही दर्शक की रिलीज का इंतजार कर रहे थे, जो अब खत्म हो चुका है और आप इसे घर बैठे देख सकते हैं।
दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज' की कहानी
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह के जीवन से प्रेरित फिल्म 'सतलुज' एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो डर, सत्ता और खामोशी के बावजूद सच्चाई की खोज में डटा रहा। टकराव और अशांति के दौर पर आधारित यह फिल्म हजारों लोगों के रहस्यमय तरीके से गायब होने की भयावह सच्चाई और न्याय की तलाश कर रहे परिवारों द्वारा भुगती गई भारी मानवीय कीमत को सामने लाती है। 25,000 से ज्यादा लापता लोगों के लिए न्याय पाने की उनकी दशकों लंबी कोशिशों की उन्हें भारी व्यक्तिगत कीमत चुकानी पड़ी, जिसने उनके साहस, त्याग और सहनशक्ति की कड़ी परीक्षा ली। दिलजीत दोसांझ की इस फिल्म हर सीन आपके दिलों-दिमाग में बस जाएगा।
फिल्म 'सतलुज' का ट्रेलर रिलीज
फिल्म मेकर्स और कास्ट ने फिल्म का ऑफिशियल ट्रेलर भी जारी किया है, जो दो मिनट से ज्यादा लंबा है और 1995 में पंजाब के राजनीतिक और सामाजिक माहौल को दिखाता है। एक वॉयसओवर के जरिए, अर्जुन रामपाल का किरदार बताता है कि जब पुलिस फोर्स उग्रवाद से निपटने में लगी हुई थी तब कुछ अफसरों ने अपने फायदे के लिए हालात का फायदा उठाया। इसके बाद ट्रेलर में सुविंदर विक्की का किरदार एक पुलिस वाले के तौर पर सामने आता है, जो दिलजीत दोसांझ के किरदार जसवंत सिंह को पुलिस के खिलाफ आवाज न उठाने की चेतावनी देता है और कहता है कि ऐसा करने पर उसे अपनी जान गंवानी पड़ सकती है।
दिलजीत दोसांझ क्यों बने 'सतलुज' का हिस्सा
फिल्म 'सतलुज' की कहानी और अपने किरदार के बारे में बात करते हुए, दिलजीत दोसांझ ने कहा:
'भाई जसवंत सिंह खालरा जी की शहादत और मानवता के लिए उनके योगदान की वजह से ही मैंने इस फिल्म का हिस्सा बनने का फैसला किया, जब मैंने पहली बार इसकी स्क्रिप्ट सुनी तो मैं बहुत प्रभावित हुआ, क्योंकि यह असल जिंदगी के अनुभवों, संघर्षों और बलिदानों पर आधारित है। एक कलाकार के तौर पर ऐसी अर्थपूर्ण कहानियों का हिस्सा बनने का मौका कम ही मिलता है। स्क्रिप्ट सुनते ही मुझे इस फिल्म के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी महसूस हुई और मैंने तय किया कि मैं ऐसे प्रेरणादायक किरदार को सच्चाई, ईमानदारी और पूरे सम्मान के साथ निभाऊंगा।'
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लेखक के बारे में
सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।
