कम लागत में किसानों को मालामाल कर रही है तोरई
तोरई की खेती: खेती और किसानी में पहले के मुकाबले अब पारंपरिक फसलों से उतना मुनाफा नहीं मिल पा रहा है, और यही वजह है कि अब किसान भाई कम समय में ज्यादा रिटर्न देने वाली नगदी फसलों की तरफ तेजी से रुख कर रहे हैं. इसी कड़ी में आज हम आपको तोरई की एक ऐसी जादुई वैरायटी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो कम लागत और बेहद कम समय में बंपर पैदावार देकर किसानों की किस्मत बदल रही है.
हम बात कर रहे हैं आगरा की बेहद फेमस तोरई की जो अपने बेहतरीन स्वाद और खास क्वालिटी की वजह से उत्तर प्रदेश के दर्जनों जिलों में धड़ल्ले से सप्लाई हो रही है. सबसे कमाल की बात यह है कि इसकी फसल महज 45 दिनों के भीतर पूरी तरह तैयार हो जाती है, जिससे किसानों की जेब में बहुत ही कम समय में कड़क नोट आने शुरू हो जाते हैं.
इसकी खेती का आसान तरीका
इस खास वैरायटी की सबसे बड़ी यूएसपी इसका कम समय में तैयार होना है, जो किसानों के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है. इसकी बुवाई के लिए खेत को अच्छी तरह जोतकर गोबर की खाद मिला ली जाती है, जिससे मिट्टी उपजाऊ हो जाए. इसके बाद सही दूरी पर इसके बीजों को लगाया जाता है.
महज 45 दिनों में फसल तैयार
महज 40 से 45 दिनों के भीतर इसके पौधों में बंपर फल आने शुरू हो जाते हैं. इसलिए इसमें कीड़े-मकोड़ों और बीमारियों का खतरा भी पारंपरिक फसलों के मुकाबले बहुत कम रहता है. कम समय की फसल होने के कारण इसमें सिंचाई और खाद का खर्च भी आधा हो जाता है. जिससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह घाटे के सौदे को बड़े मुनाफे में बदलने का सबसे धांसू जरिया बन चुकी है.
कम लागत में बंपर पैदावार
लागत की बात करें तो इस तोरई की खेती में बीज, खाद और हल्की सिंचाई को मिलाकर बेहद मामूली खर्च आता है, लेकिन इसके बदले जो पैदावार मिलती है, वह वाकई चौंकाने वाली होती है. आगरा के आसपास के इलाकों में उगाई जाने वाली इस तोरई की धाक सिर्फ लोकल मार्केट तक ही सीमित नहीं है.
यूपी के कई जिलों में डिमांड
इसकी डिमांड इतनी ज्यादा है कि इसे यूपी के कई बड़े शहरों और दर्जनों जिलों की मंडियों में हर रोज थोक के भाव सप्लाई किया जाता है. बाजार में फ्रेश और हरी तोरई देखते ही व्यापारी इसे हाथों-हाथ ऊंचे दामों पर खरीद लेते हैं. कम लागत में हर सीजन में लगातार फल देने वाली यह वैरायटी आज के दौर में कम समय के भीतर लखपति बनने का सबसे सॉलिड और हिट एग्रीकल्चर मॉडल साबित हो रही है.
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लेखक के बारे में
सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।
