जानें क्यों ChatGPT जैसे AI चैटबॉट्स आपको अपनों से कर सकते हैं दूर
नई दिल्ली। AI: अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए लाखों लोग आर्टिफिशियल इंटेजिलेंस (एआई) साथियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, लेकिन चैटजीपीटी जैसे एआई चैटबॉट पर ज्यादा निर्भर होना लोगों के लिए हानिकारक हो सकता है। एक एआई (AI) चैटबॉट बिना किसी भेदभाव या लड़ाई-झगड़े के आपकी भावनाएं समझ सकता है और आपको सहारा दे सकता है। लेकिन येल यूनिवर्सिटी के एक साइकोलॉजी प्रोफेसर ने चेतावनी दी है कि अगर कोई इंसान हमेशा ऐसे सिस्टम का इस्तेमाल करता रहेगा, जो सिर्फ उसकी हां में हां मिलाता है, तो उसके लिए असली दुनिया में लोगों के साथ रिश्ते निभाना मुश्किल हो सकता है।
इन लोगों के लिए मददगार होंगे सिस्टम
सैम हैरिस के मेकिंग सेंस पॉडकास्ट पर बातचीत करते हुए येल यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान के प्रोफेसर पॉल ब्लूम का कहना है कि आने वाले समय में चैटजीपीटी, क्लाउड या जेमिनी जैसे एआई (AI) सिस्टम उन लोगों के लिए बहुत मददगार साबित हो सकते हैं, जो अकेलेपन से जूझ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में एआई का कोई ऐसा नया वर्जन आता है, जो अकेले लोगों के दर्द और उनके अकेलेपन को कम कर सके, तो यह किसी वरदान से कम नहीं होगा। यह बहुत ही शानदार बात होगी और अकेलेपन जैसी गंभीर समस्या का एक बेहतरीन इलाज साबित होगी।
प्रोफेसर ब्लूम ने यह बात तब कही है, जब अमेरिका में बहुत सारे लोग लगातार अकेलेपन का शिकार हो रहे हैं। अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन ने 3,199 लोगों पर एक सर्वे किया, जिसमें यह सामने आया कि आधे से ज्यादा लगभग 54% लोगों को अक्सर ऐसा लगता है कि वे दूसरों से अलग यानी अकेले पड़ गए हैं।इसके अलावा, बाकी बचे 69% लोगों का कहना था कि पिछले एक साल में उन्हें जितना भी इमोशनल सपोर्ट की जरूरत थी, उतना उन्हें नहीं मिल पाया। कुछ लोगों के लिए एआई (AI) साथी अब इस कमी को पूरा कर रहे हैं।
अकेलापन दूर करने के लिए ले रहे मदद
लोगों का कहना है कि वे इन चैटबॉट्स के साथ दोस्ती और यहां तक कि रोमैंटिक रिश्ते भी बना रहे हैं और बातचीत करने, हौसला पाने व अकेलापन दूर करने के लिए इनकी मदद ले रहे हैं।
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इंसानों के साथ रिश्ते निभाना होगा मुश्किल
ब्लूम का मानना है कि जो गुण एआई साथियों को आरामदायक बनाते हैं, वे लंबे समय में समस्याएं भी पैदा कर सकते हैं। असली इंसानी रिश्तों से अलग एआई (AI) चैटबॉट्स कभी भी बेचैन नहीं होते, वे कभी हमसे माफी नहीं मांगते और ना ही हमारे गलत व्यवहार पर टोकते हैं। प्रोफेसर ब्लूम का कहना है कि एआई को इस तरह बनाया गया है कि वे हमेशा हमारी मदद के लिए तैयार रहें। इसलिए, अगर कोई इंसान इन चैटबॉट्स के साथ बहुत ज्यादा समय बिताता है, तो इसका उसके दिमाग पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है। नतीजा यह होगा कि वह असली इंसानों के साथ बातचीत करने और उनके साथ रिश्ते निभाने के लायक नहीं रह जाएगा।
कम हो सकती है दुख-दर्द समझने की भावना
सामाजिक व्यवहार पर भी एआई के प्रभाव का अध्ययन करने वाले रिसर्च ने इसी तरह की चिंताएं जताई हैं। इस साल की शुरुआत में, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्चर अनात पेरी ने एक चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर लोग एआई (AI) का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, तो उनके अंदर से दूसरों के दुख-दर्द को समझने की भावना कम हो सकती है।
एआई की वजह से लोग अपनी गलतियों पर सोचना और दूसरों के नजरिए से चीजों को देखना बंद कर सकते हैं, क्योंकि इंसानी दिमाग को इन सब बातों को सीखने के लिए जिस फीडबैक या सीख की जरूरत होती है, एआई उसे कमजोर कर देता है।
एक चिंता यह है कि एआई सिस्टम यूजर्स के विचारों को चुनौती देने के बजाय उन्हें मजबूत करते हैं। स्टैनफोर्ड के नेतृत्व में 2,405 लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि संघर्ष के दौरान चैटबॉट्स के यूजर्स के साथ सहमत होने की संभावना मनुष्यों की तुलना में कहीं अधिक थी। आलोचकों का कहना है कि यह लोगों के लिए समझौता करने, आलोचना स्वीकार करने या अपने स्वयं के व्यवहार, स्किल पर फिर से र्विचार करने के अवसरों को कम कर सकती है जो स्वस्थ मानवीय रिश्तों के लिए ये चीजें सबसे जरूरी हैं।
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