8वें वेतन आयोग में न्यूनतम वेतन ₹18,000 से बढ़ाकर ₹69,000 करने की मांग
जानिए कैसे निकला यह आंकड़ा
नई दिल्ली: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई है। कर्मचारी संगठनों ने मौजूदा ₹18,000 के न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर ₹69,000 करने की मांग की है। यह मांग केवल फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कर्मचारियों के जीवन-यापन की वास्तविक लागत को ध्यान में रखते हुए नया वेतन निर्धारण फॉर्मूला अपनाने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
राष्ट्रीय परिषद-संयुक्त परामर्श तंत्र के कर्मचारी पक्ष ने सरकार को दिए अपने ज्ञापन में कहा है कि मौजूदा वेतन निर्धारण प्रणाली आज की महंगाई और पारिवारिक जरूरतों के अनुरूप नहीं है। इसलिए वेतन तय करने के लिए परिवार के आकार, भोजन, आवास, बिजली-पानी, ईंधन और अन्य आवश्यक खर्चों के मानकों में बदलाव का सुझाव दिया गया है।
प्रस्ताव के अनुसार, जहां 7वें वेतन आयोग में वेतन की गणना तीन सदस्यों के परिवार को आधार मानकर की गई थी, वहीं अब इसे बढ़ाकर पांच सदस्यों के परिवार के आधार पर तय करने की मांग की गई है। इसके अलावा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के पोषण मानकों के अनुसार भोजन, आवास पर खर्च 3% से बढ़ाकर 7.5%, ईंधन, बिजली और पानी पर 20%, कौशल विकास पर 25% तथा सामाजिक और पारिवारिक दायित्वों के लिए 5% अतिरिक्त खर्च जोड़ने का सुझाव दिया गया है।
इन सभी मानकों के आधार पर कर्मचारी संगठनों ने न्यूनतम मूल वेतन ₹69,000 तय करने का प्रस्ताव रखा है। मौजूदा ₹18,000 के मुकाबले यह 3.833 फिटमेंट फैक्टर के बराबर है। कर्मचारी पक्ष ने पेंशन संशोधन में भी इसी फिटमेंट फैक्टर को लागू करने की सिफारिश की है। हालांकि, यह केवल कर्मचारी संगठनों का प्रस्ताव है। अंतिम फैसला 8वां वेतन आयोग अपनी सिफारिशों के बाद करेगा, जिस पर केंद्र सरकार निर्णय लेगी।
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गर्गी विश्वकर्मा वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़ी हैं और डिजिटल डिप्टी चीफ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। वह डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्पष्ट, तथ्यपरक और पाठक-केंद्रित कंटेंट तैयार करती हैं।
