खामेनेई के भव्य जनाजे के पीछे क्या है ईरान का महाप्लान

Published By Subhash Pandey
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तेहरान : ईरान अपने पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा है। यह ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार होगा, जो 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलेगा। इस कार्यक्रम में ईरान और इराक के पांच शहरों को कवर करते हुए छह दिवसीय भव्य शव यात्रा आयोजित की जा रही है। फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल के हमले में अयातुल्ला अली खामनेई समेत 40 लोग मारे गए थे। इनमें खामेनेई की बेटी और दामाद भी शामिल थे।

ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से पूरी दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर पहुंच गई थी। ईरान ने अपने सभी पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। 108 दिन के बाद लड़ाई थमी। इस दौरान सैकड़ों लोग मारे गए। इनमें बड़ी संख्या ईरान के स्कूल में मारी गई बच्चियों की थी।

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4 महीने बाद खामेनेई का अंतिम संस्कार
4 महीने बाद हो रहा खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 महीने तक नहीं किया गया। इसके पीछे की वजह रही युद्ध जैसी परिस्थितियां और सुरक्षा चिंताएं। उनके पार्थिव शरीर को कोल्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखा गया था। अब, ईरान अंतिम यात्रा की एक ऐसी तैयारी कर रहा है, जो इतिहास की किताबों में दर्ज होने जा रही है। 4 जुलाई से 9 जुलाई तक पूरे 6 दिन यह अंतिम संस्कार चलेगा। इस दौरान 2 देश के 5 शहरों से उनका जनाजा निकाला जाएगा। 

खामेनेई के अंतिम संस्कार में क्या होगा?
ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार कोई आम शोक सभा नहीं है। यह 6 दिनों तक चलने वाली एक भव्य और विशाल शव यात्रा है। यह सफर 4 जुलाई से शुरू हो रहा है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह यात्रा सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं है। इसमें पड़ोसी देश इराक को भी शामिल किया गया है। कुल 5 शहरों से होते हुए यह जनाजा गुजरेगा, जिसमें शिया समुदाय के सबसे पवित्र स्थल और ईरान की राजधानी तेहरान शामिल हैं। इसके बाद खामनेई को 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस दौरान लाखों-करोड़ों लोगों की भीड़ जुटेगी। 

सुरक्षा की पूरी तैयारी
खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए सुरक्षा ऐसी की गई है कि परिंदा भी पर न मार सके। ईरान और इराक, दोनों देशों की सरकारें इस कदर हाई अलर्ट पर हैं कि इस रूट की सुरक्षा में लाखों सैनिकों को तैनात किया गया है। 4 जुलाई से 9 जुलाई तक, जिन 5 शहरों से यह शव यात्रा गुजरेगी, उनके ऊपर की हवाई सीमा को पूरी तरह सील कर दिया गया है। किसी भी कमर्शियल फ्लाइट को वहां से उड़ने की इजाजत नहीं होगी। ईरान ने अपने सबसे एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम्स को तेहरान और इराक की सीमाओं पर 'हाई अलर्ट' पर डाल दिया है। ईरान के फाइटर जेट्स 24 घंटे आसमान में गश्त लगा रहे हैं। यह यात्रा इराक के शहरों से भी गुजरेगी, इसलिए ईरान की 'कुद्स फोर्स' और इराक की 'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेस' ने मिलकर एक जॉइंट सिक्योरिटी घेरा तैयार किया है, ताकि अमेरिका या इजरायल दोबारा किसी ड्रोन हमले की हिम्मत न कर सकें।

ईरान में दुनिया का सबसे बड़ा डिप्लोमैटिक और मिलिट्री जमावड़ा
खामनेई के जनाजे में शामिल होने के लिए दुनिया भर से लोगों को आमंत्रित किया गया है। यह आयोजन सिर्फ एक देश का शोक नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा डिप्लोमैटिक और मिलिट्री जमावड़ा बनने जा रहा है। ईरान ने इस ऐतिहासिक अंतिम संस्कार के लिए दुनिया भर के दिग्गज नेताओं को न्यौता भेजा है। इसमें रूस और चीन की मौजूदगी की भी खबरें हैं। खुफिया सूत्रों की मानें तो रूस और चीन के हाई-लेवल डेलिगेशन और सुरक्षा अधिकारी इस दौरान तेहरान में मौजूद रहेंगे। इसके साथ ही लेबनान से हिजबुल्लाह के टॉप कमांडर्स, यमन से हूती विद्रोही, और गाजा व इराक के मिलिशिया गुटों के नेता इस जनाजे में कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे। यह दुनिया को दिखाने की कोशिश है कि खामेनेई के जाने के बाद भी उनका नेटवर्क कमजोर नहीं हुआ है। साथ ही पाकिस्तान, तुर्की और कई मध्य-एशियाई देशों के राजनयिकों को भी इस 6 दिवसीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विशेष आमंत्रण भेजा गया है। 

भव्य शव यात्रा का मकसद क्या?
विशेषज्ञों के अनुसार ईरान इस भव्य शव यात्रा के जरिए कई मैसेज देना चाहता है। पहला मैसेज- अमेरिका और इजरायल को यह दिखाना कि खामेनेई के जाने के बाद भी ईरान टूटा नहीं है, बल्कि एकजुट है और दूसरा मैसेज अपने समर्थकों और पूरी शिया दुनिया को एक मंच पर लाना, ताकि आने वाले समय में एक बड़े बदले की जमीन तैयार की जा सके। 4 जुलाई से 9 जुलाई के बीच होने वाला यह अंतिम संस्कार सिर्फ एक विदाई नहीं है, बल्कि मिडिल ईस्ट की पॉलिटिक्स में आने वाले एक नए तूफान का संकेत है।

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सुभाष पांडेय एक सीनियर और अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया क्षेत्र में 32 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन, संपादन और रिपोर्टिंग के विभिन्न आयामों में कार्य करते हुए पत्रकारिता को मजबूत दिशा दी है।

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