दुर्गापुर एसबीएसटीसी डिपो में मिथेन गैस सर्वे को लेकर विवाद, अनुमति प्रक्रिया पर उठे सवाल
विधायक ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
- एसबीएसटीसी डिपो में मिथेन गैस की तलाश के लिए खुदाई शुरू।
- संचालन बोर्ड नहीं होने के बावजूद निजी कंपनी को अनुमति मिलने पर विवाद।
- पूर्व चेयरमैन ने अनुमति प्रक्रिया को नियमों के विपरीत बताया।
पश्चिम बर्दवान। दक्षिण बंगाल राज्य परिवहन निगम (एसबीएसटीसी) के दुर्गापुर ट्रंक रोड डिपो परिसर में भूमिगत मिथेन गैस की मौजूदगी का पता लगाने के लिए शुक्रवार को खुदाई का काम शुरू किया गया है।
इस खुदाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि निगम में फिलहाल कोई संचालन बोर्ड नहीं होने के बावजूद स्थानीय अधिकारियों ने एक निजी कंपनी को भारी मशीनों के साथ डिपो परिसर में खुदाई की अनुमति दे दी।
बताया जा रहा है कि पिछले लगभग एक महीने से निजी कंपनी यहां सर्वे और खुदाई का काम कर रही है। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि परिवहन विभाग और मंत्री को पूरी जानकारी दिए बिना यह अनुमति कैसे दी गई।
एसबीएसटीसी के पूर्व चेयरमैन सुभाष मंडल ने कहा कि संचालन बोर्ड के बिना इस तरह की अनुमति देना नियमों के अनुरूप नहीं है। ऐसे मामलों में बोर्ड या परिवहन विभाग की मंजूरी आवश्यक होती है।
डिपो की सीमा से सटा घनी आबादी वाला इलाका होने के कारण स्थानीय लोगों में भी चिंता बढ़ गई है। आशंका जताई जा रही है कि यदि मिथेन गैस निकलती है तो किसी दुर्घटना का खतरा पैदा हो सकता है।
खुदाई के दौरान निकलने वाले पानी को जमा करने के लिए डिपो परिसर में दो कृत्रिम जलाशय भी बनाए गए हैं। इससे पहले इसी निजी कंपनी के एक अन्य प्रोजेक्ट में जलाशय में गिरने से एक कर्मचारी की मौत हो चुकी थी, जिसके कारण सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
एसबीएसटीसी के प्रबंध निदेशक प्रणव कुमार घोष ने बताया कि निजी कंपनी ने सर्वेक्षण की अनुमति मांगी थी, जिसके बाद स्थानीय प्रबंधन ने खुदाई की मंजूरी दी।
वहीं कंपनी की जनसंपर्क अधिकारी मोनालिसा बनर्जी ने कहा कि यह केवल यह पता लगाने के लिए सर्वे किया जा रहा है कि जमीन के नीचे मिथेन गैस मौजूद है या नहीं। उनके अनुसार इस कार्य से किसी प्रकार का खतरा नहीं है।
इस पूरे मामले को लेकर विधायक लक्ष्मण घुरुई ने भी कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने खुदाई की अनुमति की जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि एसबीएसटीसी के खिलाफ पहले से कई अनियमितताओं की शिकायतें हैं।
लाभदायक बस रूट बंद किए गए हैं और कर्मचारियों के तबादलों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।\
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