बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत ग्रामीणों को किया जागरूक
राष्ट्रीय लोक अदालत की भी दी जानकारी
रामनाथ सिंह, तरुण मित्र
बिजनौर। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के आदेशानुसार एवं जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर संजय कुमार सप्तम के मार्गदर्शन में सोमवार को पंचायत घर इटावा, मौहम्मदपुर देवमल में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बिजनौर स्वाति चंद्रा ने की, जबकि संचालन तहसीलदार आशीष सक्सेना ने किया।
शिविर में सचिव स्वाति चंद्रा ने ग्रामीणों को नालसा द्वारा संचालित ‘आशा 2025’ योजना के अंतर्गत बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारत में लड़कियों के विवाह की कानूनी आयु 18 वर्ष तथा लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित है। इससे कम आयु में विवाह कराना कानूनन अपराध है। बाल विवाह के मामले में दो वर्ष तक के कठोर कारावास तथा एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि उनके आसपास या कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचना दें और इस कुप्रथा को रोकने में सक्रिय सहभागिता निभाएं। उन्होंने कहा कि सामूहिक जागरूकता और कानून के प्रति जानकारी के माध्यम से बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
शिविर में एसिड अटैक पीड़ितों को विधिक सहायता, बच्चों के लिए बाल-हितैषी कानूनी सेवाएं योजना-2024, मानव तस्करी एवं व्यावसायिक शोषण के पीड़ितों के लिए विधिक सहायता सहित नालसा की विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी दी गई। ग्रामीणों को नालसा के टोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 के बारे में भी अवगत कराया गया।
12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत, आपसी समझौते से होगा वादों का निस्तारण
सचिव ने आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत 12 सितंबर 2026 के संबंध में भी ग्रामीणों को जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि लोक अदालत में पक्षकार अपने वादों का निस्तारण आपसी सुलह-समझौते के आधार पर करा सकते हैं। इसकी प्रक्रिया सरल एवं सुगम है और इसमें कानूनी जटिलताओं से बचते हुए मामलों का शीघ्र निस्तारण संभव है।
उन्होंने बताया कि लोक अदालत में शमनीय आपराधिक मामले, धारा 138 एनआई एक्ट से संबंधित चेक बाउंस के मामले, बैंक रिकवरी, मोटर दुर्घटना प्रतिकर वाद, बिजली एवं पानी के बिल से संबंधित शमनीय दंड वाद, राजस्व वाद, सिविल वाद, आरबिट्रेशन से संबंधित वाद तथा प्री-लिटिगेशन वैवाहिक विवाद आदि का निस्तारण कराया जा सकता है।
उन्होंने वादकारियों से अपील की कि वे 12 सितंबर को निर्धारित समय एवं स्थान पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से अपने मामलों का निस्तारण कराएं और राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाएं। इस अवसर पर तहसीलदार सदर आशीष सक्सेना, खंड विकास अधिकारी राजवीर सिंह, पंचायत सचिव विशाल अग्रवाल, ग्राम प्रधान सपन, पंचायत सहायक दिव्या, पराविधिक स्वयंसेवक संजीव कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
