श्रीराम कथा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, शिव-विवाह प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
मोहम्मद अय्यूब
उतरौला। अबाबा श्री दुःखहरणनाथ मंदिर सेवा समिति के तत्वावधान में रामेश्वरम मैदान, मोहल्ला आर्यनगर, पिपरा घाट तिराहा पर आयोजित द्वितीय संगीतमयी पंचदिवसीय श्री राम कथा महोत्सव एवं सनातन उद्बोधन कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा वाचिका साध्वी अमृता त्रिपाठी ने भगवान श्रीराम के चरित्र, माता सती के त्याग, भारतीय नारी की गरिमा तथा भगवान शिव के विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं ओजस्वी वर्णन किया।
कथावाचिका साध्वी अमृता त्रिपाठी ने कहा कि श्रीराम कथा केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि मानव जीवन को आदर्श बनाने का मार्ग है। उन्होंने बताया कि कथा के क्रम में महर्षि अगस्त्य द्वारा भगवान शिव को श्रीराम कथा सुनाने का प्रसंग आया, जिसमें श्रीराम के दिव्य स्वरूप और उनके अवतार के उद्देश्य का विस्तार से वर्णन किया गया। इसके साथ ही माता सती द्वारा भगवान श्रीराम की परीक्षा लेने की कथा का भी उल्लेख किया गया। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति ईश्वर की महिमा को समझने के बजाय अपने अहंकार को महत्व देता है, तब उसे पश्चाताप का सामना करना पड़ता है।
ये खबर भी पढ़े : महिलाओं के उत्पीड़न के आरोपों से घिरा कथित पत्रकार, किसान यूनियन की महिला सदस्यों ने खोला मोर्चाकथावाचिका साध्वी अमृता त्रिपाठी
ने भारतीय नारी की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति, करुणा, त्याग और संस्कारों की आधारशिला माना गया है। परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने माता के महात्म्य का वर्णन करते हुए कहा कि संसार में मां का स्थान सर्वोच्च है और मां के आशीर्वाद से ही व्यक्ति जीवन में सफलता प्राप्त करता है।
कथा के दौरान राजा दक्ष के यज्ञ का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि माता सती अपने पिता दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में जाने की जिद करती हैं, जबकि भगवान शिव उन्हें बिना निमंत्रण जाने से मना करते हैं। इसके बावजूद सती अपने पिता के घर पहुंचती हैं, जहां भगवान शिव का अपमान देखकर वे अत्यंत व्यथित हो जाती हैं और यज्ञ कुंड में अपने शरीर का त्याग कर देती हैं। इस प्रसंग को सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।
इसके पश्चात वीरभद्र के प्राकट्य और राजा दक्ष के संहार का वर्णन करते हुए कथावाचिका ने बताया कि जब अधर्म और अहंकार अपनी सीमा पार कर जाते हैं, तब धर्म की स्थापना के लिए दैवी शक्ति का प्रकट होना निश्चित हो जाता है।
आज की कथा का मुख्य विषय भगवान शंकर का विवाह रहा। साध्वी अमृता त्रिपाठी ने भगवान शिव और माता पार्वती के पावन विवाह का अत्यंत रोचक एवं संगीतमय वर्णन किया। उन्होंने बताया कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी अटूट श्रद्धा, समर्पण और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें स्वीकार किया। शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भक्ति भाव से झूम उठे और पूरा पंडाल "हर-हर महादेव" तथा "बोल बम" के जयघोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विधायक राम प्रताप वर्मा, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि अनूप चंद्र गुप्ता तथा नगर पालिका चेयरमैन संगीता गुप्ता सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं से आगामी कथा सत्रों में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धर्म लाभ प्राप्त करने की अपील की। कथा महोत्सव का समापन 21 जून को पूर्णाहुति हवन एवं विशाल भंडारे के साथ होगा, जिसमें क्षेत्र के हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
