जातिगत जनगणना का मौजूदा प्रारूप दोषपूर्ण : जयहिन्द
लखनऊ। कांग्रेस कमेटी के पिछड़ा वर्ग विभाग के चेयरमैन डॉ0 अनिल जयहिन्द ने कहा कि जातिगत जनगणना का मौजूदा प्रारूप दोषपूर्ण है। इसलिए राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम जनता के साथ चर्चा करने के बाद ही नई प्रश्नावली तैयार की जानी चाहिए। तभी हर जाति और समुदाय की सही संख्या सामने आ सकेगी।
डॉ0 अनिल जयहिन्द ने कहा कि जातिगत जनगणना कराने में मोदी सरकार की नीयत साफ नहीं है। 2023 और 2024 के चुनावों के समय जब कांग्रेस ने जातिगत जनगणना की मांग की थी, तब प्रधानमंत्री ने एक साक्षात्कार में इसे अर्बन नक्सल सोच बताया था। केन्द्र सरकार के पास अभी भी प्रारूप में सुधार करने का समय है, क्योंकि अभी जातिगत जनगणना जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में ही शुरू हुई है।
फरवरी 2027 से इसे पूरे देश में शुरू किया जाना है। उन्होने कहा कि कांग्रेस पिछड़ों, दलितों और शोषितों के हक की लड़ाई से पार्टी पीछे नहीं हटेगी। इस जनगणना में हर जातियों की तरह ओबीसी कालम भी बढ़ाया जाना आवश्यक है।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
