लेखपाल की मनमानी, सगे भाइयों की जमीन पर बना डाले अलग-अलग नियम!
आरोप, बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के अपनी जमीन की रजिस्ट्री करवा दी
बीकेटी तहसीलदार बोले, त्दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई होगी और अवैध कब्जा हटाया जाएगा
बीकेटी, लखनऊ। तहसील क्षेत्र से भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मनमानी का एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। क्षेत्र के देवरी रुखारा गांव में तैनात क्षेत्रीय लेखपाल रेशमा रानी पर पट्टे की जमीनों की रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज में दोहरे मापदंड अपनाने और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।
आरोप है कि, लेखपाल ने एक ही परिवार के दो सगे भाइयों की जमीन के लिए अपने व्यक्तिगत हितों और मनमुताबिक कायदे-कानून बना डाले। इसके अलावा, गांव में सरकारी चकमार्ग पर दबंगों द्वारा किए जा रहे अवैध निर्माण को भी मूक सहमति देने का आरोप राजस्व कर्मियों पर लग रहा है। इस मामले के उजागर होने के बाद तहसील प्रशासन में हड़कंप मच गया है और तहसीलदार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
पूरा मामला देवरी रुखारा गांव का है, जहां गाटा संख्या 881 और 882 की भूमि पट्टे के अंतर्गत आती है। यह दोनों जमीनें सगे भाइयों बाबूलाल और सियाराम के नाम पर थीं। नियमों के मुताबिक, पट्टे की जमीन की खरीद-बिक्री या रजिस्ट्री के लिए सक्षम जिला प्रशासन या जिलाधिकारी से विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य होता है। लेकिन देवरी रुखारा गांव में लेखपाल ने नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया।पहले मामले में, गाटा संख्या 881 के पट्टाधारक बाबूलाल ने बिना किसी प्रशासनिक अनुमति के अपनी जमीन की रजिस्ट्री करवा दी।
हैरान करने वाली बात यह रही कि लेखपाल रेशमा रानी ने इस गैर-कानूनी रजिस्ट्री को न सिर्फ हरी झंडी दी, बल्कि राजस्व अभिलेखों में इसका दाखिल-खारिज भी आसानी से दर्ज करवा दिया। वहीं दूसरी ओर, जब बाबूलाल के सगे भाई सियाराम ने गाटा संख्या 882 की पट्टे की जमीन को बिना आवश्यक प्रमाणपत्र के बेचा, तो लेखपाल का रुख पूरी तरह बदल गया। सियाराम के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए राजस्व टीम ने कार्यवाही की और उसकी जमीन को निजी हाथों में सौंपने के बजाय सीधे राज्य सरकार में निहित कर दिया।
जमीन के इस हेरफेर के बीच, देवरी रुखारा गांव में एक और बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। गांव की गाटा संख्या 879 सरकारी राजस्व अभिलेखों में आधिकारिक तौर पर 'रास्ता' के रूप में दर्ज है। आरोप है कि गांव के ही कुछ रसूखदार और दबंग लोग इस सरकारी चकमार्ग पर धड़ल्ले से अवैध निर्माण कार्य करवा रहे हैं।ग्रामीणों ने इस अवैध कब्जे की शिकायत तहसील के उच्चाधिकारियों से की थी। प्रशासन ने इस मामले को संज्ञान में लेते हुए शिकायत निस्तारण के लिए 27 जून की अंतिम समय-सीमा तय की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि भू-माफिया और स्थानीय हल्के के राजस्व कर्मियों की मिलीभगत के कारण ही शिकायत के बावजूद निर्माण कार्य को रुकवाया नहीं जा सका है। बीकेटी के तहसीलदार शरद सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। तहसीलदार शरद सिंह ने बताया कि प्रकरण की गहराई से जांच के लिए राजस्व निरीक्षक और लेखपाल की एक संयुक्त टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यह टीम तत्काल मौके पर जाकर दोनों पट्टों की रजिस्ट्री की वैधानिकता, दाखिल-खारिज की प्रक्रिया और चकमार्ग संख्या पर हो रहे अवैध निर्माण की भौतिक स्थिति की जांच करेगी। तहसीलदार ने आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक और विभागीय कार्यवाही की जाएगी और सरकारी रास्ते से अवैध कब्जा हटाया जाएगा।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
