रामपुर रज़ा पुस्तकालय द्वारा आयोजित तीन दिवसीय योगोत्सव-2026 के अंतर्गत स्वरसाधना योग प्रतियोगिता का आयोजन
जिला योगासन खेल संघ,रामपुर के सहयोग से संपन्न हुई प्रतियोगिता
मुजाहिद खां
रामपुर:शनिवार को रामपुर रज़ा पुस्तकालय द्वारा आयोजित तीन दिवसीय योगोत्सव-2026 के अंतर्गत रंग महल सभागार में स्वरसाधना योग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।यह प्रतियोगिता जिला योगासन खेल संघ,रामपुर के सहयोग से संपन्न हुई।प्रतियोगिता में विभिन्न जनपदों के विद्यालयों एवं संस्थानों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।इनमें प्राथमिक विद्यालय लालपुर कला,कम्पोजिट विद्यालय मुड़िया खेड़ा,कम्पोजिट विद्यालय खौद,उच्च प्राथमिक विद्यालय (यू.पी.एस.) खौद,कन्या इंटर कॉलेज खारी कुआँ,राजकीय कृषि कन्या इंटर कॉलेज,शांति योगासन अकादमी,सिमरन स्कूल,सेंट पॉल सीनियर सेकेंडरी स्कूल तथा गुरुकुल दयानंद सेवा आश्रम जूनियर हाईस्कूल,वेद मंदिर, रठौंडा के लगभग 50 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
प्रतियोगिता को आयु वर्ग के आधार पर दो श्रेणियों में विभाजित किया गया।प्रथम श्रेणी में 10 से 14 वर्ष आयु वर्ग तथा द्वितीय श्रेणी में 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बालक एवं बालिकाएँ शामिल रहे।प्रतिभागियों ने आर्टिस्टिक एवं पारंपरिक योगा का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अपनी प्रतिभा,अनुशासन,शारीरिक दक्षता तथा योग के प्रति समर्पण का परिचय दिया।इस अवसर पर रामपुर रज़ा पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय का हमेशा यह आग्रह रहता है कि हम अधिक से अधिक नई पीढ़ी का प्रबोधन करें क्योंकि यही पीढ़ी है जो चाहे धरोहर हो,परंपरा हो अथवा ज्ञान हो, वही इसको आगे ले जाती है,इसलिए हमारे विभिन्न कार्यक्रमों में विशेषकर योगोत्सव में एक दिन पूरा बच्चों के लिए समर्पित करते हैं।हम जब अपना रामपुर रज़ा पुस्तकालय महोत्सव भी आयोजित करते हैं,तो उसमें भी हम इस बात का पूरा ध्यान रखते हैं कि बच्चों की प्रतिभागिता उसमें हो और योग जैसा विषय इसका प्रबोधन बच्चों को हो,इससे बेहतर शिक्षा और कुछ हो ही नहीं सकती।
योग समग्रता से विकास करता है।आपने अगर एक योगासन किया तो ऐसा नहीं है कि कोई देह का विशेष अंग प्रभावित होता है या स्वस्थ होता है बल्कि वह पूरे देह पर अपना असर छोड़ता है और जब देह स्वस्थ होती है तो मन स्वस्थ होता है,मन स्वस्थ होता है तो शुभ विचार आते हैं,शुभ विचार आते हैं तो शुभ संकल्प होते हैं और जब शुभ संकल्प होता है तब लोक में समाज में शुभ कार्य होते हैं,इसलिए योग न केवल हमारे वैयक्तिक जीवन में बल्कि लोक जीवन में भी शुभ का प्रेषण है और हम सबको इस बात का गर्व है कि योग जैसी अनूठी चमत्कारिक संपूर्ण मानवता का कल्याण करने वाली विद्या का विकास हमारे भारत में हुआ।भारत सदा से अपने खिड़की दरवाजे हर प्रकार के विचारों को आने के लिए खोल कर रखता रहा है,जिसमें ऋग्वेद की एक युक्ति है,“आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः”,इस मंत्र का अर्थ है कि सद्विचार पृथ्वी पर,ब्रह्मांड में जहां भी जिस रूप में हैं वह हम तक आये।
अपने आँख-कान बंद मत कीजिए,जहां से जैसा भी विचार आ रहा है उसको आने दीजिए और उसमें से हंस की भाँति,जैसे हंस दूध और पानी को अलग-अलग कर देता है,वैसे ही जो उसमें शुभ है,सद्विचार है,उसको अपनाएं और अपने आचरण में लाएं।अष्टांग योग में यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार,धारणा,ध्यान,समाधि हैं और इसमें सबसे महत्व का और पहला सोपान यम का है और यम में विशेष बल हमारे व्यवहार पर है यानी कि हमारा आचार-विचार और व्यवहार इस प्रकार का हो जिसमें धर्म,नीति,न्याय, सत्य,मर्यादा,सदाचार का संस्कार पड़े और यदि इस प्रकार के संस्कार हमारे भीतर आते हैं तो हमारा स्वयं का व्यवहार,हमारा लोक-व्यवहार इतना शुभ होगा कि पृथ्वी पर सम्पूर्ण मानव जाति के समक्ष किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं रहेगी।यहां पर बहुत से योगाभ्यासी भी बैठे हुए हैं और जो बच्चे इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले हैं वह स्वयं भी योगाभ्यास निरंतर करते हैं।आप सब ने अनुभव किया होगा कि योग हमारे भीतर किस प्रकार के चमत्कारिक परिवर्तन लाता है।यह हम भारतवंशियों का दायित्व है कि हम इसको पृथ्वी के कोने-कोने तक ले जाएं और पृथ्वी का प्रत्येक मनुष्य इससे लाभान्वित हो यह दायित्व हमारे ऋषि-महर्षियों ने हज़ारों वर्ष पूर्व ही हम भारतवंशियों को सौंप दिया था।
ये खबर भी पढ़े : उज्जैनः केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने की ऊर्जा विभाग, स्वच्छ भारत मिशन और सिंहस्थ : 2028 की तैयारियों की समीक्षाउन्होंने उद्घोष किया,पृथिव्यां सर्वमानवाः,उन्होंने यह नहीं कहा कि इस मजहब के लिए,इस भाषा के लिए,इस भूभाग के लिए,इस लिंग के लिए,इस उपासना पद्धति के लिए,उन्होंने कहा पृथिव्यां सर्वमानवाः पृथ्वी पर जो भी व्यक्ति जिस रूप में जैसा भी है,वहां से वह वैसा ही परिष्कार को,उत्कर्ष को प्राप्त हो,यही हमारे योग का मुख्य ध्येय है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस प्रकार से अब यह एक आंदोलन का रूप ले चुका है,वह हम सब जानते हैं।178 देशों ने एक साथ यह निर्णय लिया कि योग को हम 21 जून को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाएंगे।योगोत्सव के अंतर्गत कल योग-संगम का आयोजन हो रहा है और यह 178 देशों से अधिक स्थानों पर होने वाला है।एक ही विषय को समर्पित इतना विशाल योगाभ्यास कार्यक्रम पृथ्वी पर अपने आप में अद्वितीय है तथा एसा कोई दूसरा उदाहरण मिलना कठिन है।कल एक नया गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनने वाला है।हम सब को इस बात का गर्व है कि सम्पूर्ण मानव जाति के लिए हमारी धरती ने एक ऐसी विद्या दी है जिससे सबको स्वास्थ्य लाभ होता है,अपने आप को पहचानने की शक्ति प्राप्त होती है।सत्य को सहजता और सरलता से स्वीकार करने का भाव जागृत होता है।यह सब केवल एक विद्या योग से आपको प्राप्त हो जाता है और आज पृथ्वी पर जितने भी संकट हैं यदि ठीक प्रकार से पृथ्वी के सभी मनुष्य इस योग के जो अष्टांग हैं जिसमें यम-नियम का भी महत्व उतना ही है जितना धारणा,ध्यान और समाधि का है या योगासन का है।
तो हम अपने यम-नियम को ठीक प्रकार से साध लें तो किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं रहेगी।आज जो बच्चे इस प्रतियोगिता में भाग ले रहें हैं वह सभी एक बहुत ही अनूठी विद्या में पारंगत हुए हैं और इसको आगे ले जाना इसको दूसरों तक पहुंचाना यही हम सब का धर्म है क्योंकि धर्म के विषय में गोस्वामी तुलसीदास ने कहा है,”परहित सरिस धरम नहि भाई, पर पीड़ा सम नहि अधमाई”,जिसका सीधा अर्थ है कि परहित से ऊंचा कोई धर्म नहीं है और दूसरे को पीड़ा पहुंचाने से नीचा कोई अधर्म नहीं है और योग से सुंदर क्या हो सकता है यदि हम किसी दूसरे के जीवन में उसे ले आएं तो इससे बड़ा हित हम क्या कर सकते हैं।इसलिए इन बच्चों को हृदय से प्रणाम करता हूं कि इन्होंने योग की विद्या को लिया और आज इस प्रतियोगिता में भाग लेकर हमारे संचार के माध्यम से पूरे भूमंडल में यह जाने वाला है।आने वाले समय में योगः कर्मसु कौशलम् का जो हमारा गीता में यह मंत्र आया है जिसका अर्थ है कि योग से आपके कर्म का कौशल भी बढ़ता है और जिसने भी योग किया है वह इस बात को भली भांति जानता है कि योग से जो भी कर्म हम कर रहे हैं वो और कुशलता पूर्वक करने की दक्षता और क्षमता हमारे अंदर आती है। इसलिए योग को अपने जीवन में उतारें और अन्य के जीवन में भी वह उतरे इसका प्रयास करें।आज आयोजित इस प्रतियोगिता के विजेता प्रतिभागियों को 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले "योग संगम" कार्यक्रम में पुरस्कृत किया जाएगा।इस प्रतियोगिता कार्यक्रम का संचालन जिला योगासन खेल संघ,रामपुर के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अनूप सिंह द्वारा किया गया।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
