बिजली कर्मचारियों के उत्पीड़न पर संघर्ष समिति ने जताई नाराजगी
बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने में इंजीनियरों और कर्मचारियों के योगदान को बताया महत्वपूर्ण
- नौ वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों का वास्तविक श्रेय बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों को, लेकिन आज भी उत्पीड़न : संघर्ष समिति
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र की नौ वर्षों की उपलब्धियां , प्रदेश में ऊर्जा क्षेत्र में पिछले वर्षों के दौरान हुई उल्लेखनीय प्रगति—बिजली उत्पादन, पारेषण एवं वितरण व्यवस्था का विस्तार, नए उपकेंद्रों का निर्माण, ट्रांसफार्मरों की स्थापना, विद्युत लाइनों का विस्तार, रिकॉर्ड उपभोक्ताओं को बिजली कनेक्शन, विद्युत आपूर्ति में सुधार, लाइन हानियों में कमी, उपभोक्ता सेवाओं का डिजिटलीकरण तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में विद्युत व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण जैसी सभी उपलब्धियों के पीछे प्रदेश के लाखों बिजली कर्मचारियों,संविदा कर्मियों एवं बिजली इंजीनियरों का अथक परिश्रम, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा रही है।
उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी, बारिश, आंधी-तूफान तथा विषम परिस्थितियों में भी बिजली कर्मचारी और इंजीनियर दिन-रात कार्य कर प्रदेशवासियों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं। इनकी मेहनत और प्रतिबद्धता के कारण ही उत्तर प्रदेश ऊर्जा क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है।
किन्तु अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि एक ओर सरकार ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों का प्रचार कर रही है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं उपलब्धियों के वास्तविक निर्माता बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों का पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि 19 मार्च, 2023 को माननीय ऊर्जा मंत्री द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों के विरुद्ध की गई उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों को वापस लिया जाए। किंतु आज तक उन निर्देशों का पालन नहीं किया गया है। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में कर्मचारियों एवं इंजीनियरों के पदोन्नति (प्रमोशन), सेवा संबंधी लाभ, वेतन संबंधी देयकों तथा सेवानिवृत्ति लाभों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और अनेक प्रकरण वर्षों से लंबित पड़े हैं।
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों के साथ किए गए विभिन्न समझौतों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। एक ओर कर्मचारियों से उत्कृष्ट प्रदर्शन और बेहतर विद्युत व्यवस्था की अपेक्षा की जाती है, वहीं दूसरी ओर उनका मनोबल गिराने वाली उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां जारी हैं। यह स्थिति न केवल कर्मचारियों के हितों के विरुद्ध है, बल्कि ऊर्जा क्षेत्र के दीर्घकालीन विकास के लिए भी उचित नहीं है।
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से आग्रह किया है कि वे इस विषय में प्रभावी हस्तक्षेप करें तथा पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन को निर्देशित करें कि 19 मार्च, 2023 के ऊर्जा मंत्री के निर्देशों का तत्काल पालन कराया जाए, मार्च 2019 आंदोलन से संबंधित सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस ली जाएं, कर्मचारियों एवं इंजीनियरों के लंबित सेवा संबंधी मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए तथा सभी समझौतों का ईमानदारी से पालन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने कहा कि जब बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों का उत्पीड़न समाप्त होगा, तब वे पूर्ण मनोयोग एवं द्विगुणित उत्साह के साथ प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा उत्तर प्रदेश को ऊर्जा क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए पहले की तरह समर्पित भाव से कार्य कर सकेंगे।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
