अब घंटों नहीं, मिनटों में जुड़ेगा लखनऊ-कानपुर, 13 जुलाई से खुलेगा एक्सप्रेसवे

13 जुलाई से खुलेगा एक्सप्रेसवे, सफर, कारोबार और निवेश तीनों को मिलेगी रफ्तार

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रवि गुप्ता

  • 62.76 किलोमीटर के छह लेन मार्ग पर आधुनिक ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था
  • गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा कॉरिडोर, उन्नाव समेत पूरे मध्य यूपी को मिलेगा लाभ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के दो सबसे बड़े शहरों लखनऊ और कानपुर के बीच वर्षों से प्रतीक्षित एक्सप्रेसवे अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। 13 जुलाई को रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह द्वारा इसके उद्घाटन के साथ ही दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय घटकर महज 45 से 60 मिनट रह जाएगा। लगभग 62.76 किलोमीटर लंबे इस छह लेन एक्सप्रेसवे को प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में माना जा रहा है। इससे न केवल आवागमन आसान होगा, बल्कि औद्योगिक, व्यावसायिक और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

करीब 4,700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का निर्माण आधुनिक मानकों के अनुरूप किया गया है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे आठ लेन तक विस्तारित करने की संभावना भी रखी गई है। मार्ग का बड़ा हिस्सा ग्रीनफील्ड है, जबकि लखनऊ क्षेत्र में लगभग 18 किलोमीटर का एलिवेटेड सेक्शन बनाया गया है।

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यह मार्ग अमौसी क्षेत्र से शुरू होकर उन्नाव होते हुए कानपुर के शुक्लागंज तक पहुंचेगा।वर्तमान में लखनऊ और कानपुर के बीच सड़क यात्रा में अक्सर डेढ़ से ढाई घंटे का समय लग जाता है। ट्रैफिक जाम और भारी वाहनों के दबाव के कारण यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद यह दूरी एक घंटे से भी कम समय में तय की जा सकेगी। इसका सबसे अधिक लाभ रोजाना दोनों शहरों के बीच आने-जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों, व्यापारियों और उद्योगों को मिलेगा।

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अत्याधुनिक तकनीक है। पूरे कॉरिडोर पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) लगाया गया है। इसमें 80 से अधिक हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, स्पीड रडार, वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी कॉल बॉक्स और वेरिएबल मैसेज साइन जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। दुर्घटना या किसी अन्य आपात स्थिति में राहत दल को कम समय में मौके पर पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है। टोल वसूली के लिए फास्टैग और आॅटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) तकनीक लागू होगी। इससे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा और सफर अधिक सुगम होगा। चार टोल प्लाजा प्रस्तावित हैं, जबकि अंतिम टोल दरों की घोषणा उद्घाटन से पहले की जाएगी।

यह एक्सप्रेसवे केवल दो शहरों को जोड़ने वाली सड़क नहीं, बल्कि मध्य उत्तर प्रदेश के विकास का नया गलियारा भी माना जा रहा है। मार्ग को भविष्य में गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, जिससे प्रयागराज, मेरठ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक तेज संपर्क स्थापित होगा। उन्नाव जिले में भी औद्योगिक निवेश और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। उद्घाटन के अवसर पर लखनऊ के इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर 108 करोड़ रुपये की लागत वाले चार लेन फ्लाईओवर की आधारशिला भी रखी जाएगी। साथ ही 123 किलोमीटर लंबे कानपुर-कबरई ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना को भी गति मिलने की उम्मीद है, जिससे बुंदेलखंड क्षेत्र की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क नेटवर्क केवल यात्रा का समय नहीं घटाता, बल्कि उद्योग, निवेश, रोजगार और रियल एस्टेट को भी नई दिशा देता है। यदि इस एक्सप्रेसवे का संचालन तय समय पर शुरू होता है तो यह लखनऊ-कानपुर कॉरिडोर को उत्तर भारत के सबसे तेज और आधुनिक परिवहन गलियारों में शामिल कर देगा। प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास को गति देने में यह परियोजना आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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लेखक के बारे में

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हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।

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