- कार्यक्रम में प्रदेश भर के वरिष्ठ अधिकारी, विषय विशेषज्ञ और पशु चिकित्सक भाग लेंगे
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार के पशुपालन विभाग द्वारा पशु चिकित्सकों के लिए जूनोटिक (पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाले) एवं प्राथमिक पशु रोगों पर 09 व 10 जुलाई को दो दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण (ज्तंपदपदह व िज्तंपदमते-ज्वज्) कार्यक्रम का होटल गोल्डन ट्यूलिप,
लखनऊ में पूर्वाहन 10ः00 बजे से किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण को झपाइगो (श्रीचपमहव) का तकनीकी सहयोग प्राप्त है तथा इसमें प्रदेश भर के वरिष्ठ अधिकारी, विषय विशेषज्ञ और पशु चिकित्सक भाग ले रहे हैं।
पशुपालन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार कार्यक्रम का उद्घाटन मुकेश कुमार मेश्राम, अपर मुख्य सचिव, पशुपालन विभाग, देवेंद्र कुमार पाण्डेय, विशेष सचिव, पशुपालन विभाग, डॉ. संगीता तिवारी, निदेशक, पशुपालन विभाग, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, निदेशक (प्रशासन एवं विकास) सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया जाएगा।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकारी पशु चिकित्सकों की तकनीकी एवं प्रशिक्षण क्षमता को बढ़ाना है, ताकि वे जूनोटिक एवं प्राथमिक पशु रोगों की शीघ्र पहचान, प्रारंभिक निदान, निगरानी, रिपोर्टिंग, रोकथाम और नियंत्रण में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकें।
इसके साथ ही, इस कार्यक्रम के माध्यम से मास्टर ट्रेनर्स का एक समूह तैयार किया जाएगा, जो आगे चलकर जिला एवं क्षेत्रीय स्तर पर पशु चिकित्सकों और पैरावेटरिनरी कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे। इससे राज्य में रोग निगरानी एवं महामारी की तैयारी को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
दो दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को रेबीज (त्ंइपमे), अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लुएंजा (भ्च्।प्), लेप्टोस्पायरोसिस, जापानी इंसेफेलाइटिस, बोवाइन ट्यूबरकुलोसिस, क्राइमियन-कांगो हेमोरेजिक फीवर (ब्ब्भ्थ्), एन्थ्रेक्स, स्क्रब टायफस, ग्लैंडर्स, लम्पी स्किन डिजीज, ब्रूसेलोसिस, साल्मोनेलोसिस, डर्माटोफाइटोसिस जैसे महत्वपूर्ण रोगों पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी।
प्रशिक्षण में रोगों के प्रसार, संक्रमण के तरीके, प्रमुख लक्षण, संदिग्ध एवं पुष्ट मामलों की पहचान, रोकथाम एवं नियंत्रण उपाय, निगरानी एवं रिपोर्टिंग प्रणाली, प्रयोगशाला जांच क्षमता, जैव सुरक्षा (ठपवेंमिजल) तथा नमूनों के सही संग्रह, पैकेजिंग एवं परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी शामिल किया गया है। यह पहल उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत वन हेल्थ दृष्टिकोण के माध्यम से राज्य में पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाते हुए जूनोटिक एवं प्राथमिक पशु रोगों से निपटने की तैयारी को और बेहतर बनाया जा रहा है।