राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: केंद्र भी हुआ सक्रिय, आज अयोध्या पहुंचेगी एसआईटी
एफआईआर न होने पर बरकरार हैं सवाल
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी के मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। प्रकरण के सामने आने के बाद जहां उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है, वहीं केंद्र सरकार भी इस मामले पर नजर बनाए हुए है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) की ओर से एक वरिष्ठ अधिकारी के अयोध्या पहुंचकर मामले की जानकारी जुटाने की चर्चा है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मामले की जांच के लिए गठित तीन सदस्यीय एसआईटी सोमवार को अयोध्या पहुंचकर अपनी जांच शुरू करेगी। टीम ट्रस्ट के पदाधिकारियों, मंदिर कर्मचारियों और मामले में चिह्नित संदिग्धों से पूछताछ करेगी। साथ ही ट्रस्ट द्वारा अब तक की गई आंतरिक जांच का पूरा ब्योरा भी जुटाया जाएगा।
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राम मंदिर की दान राशि में कथित हेराफेरी का मामला करीब एक सप्ताह पहले सामने आया था। इसके बाद से ट्रस्ट के पदाधिकारी अपने स्तर पर गोपनीय जांच में जुटे हुए हैं। हालांकि सबसे बड़ा सवाल यह है कि गबन या धन की अनियमितता के संकेत मिलने के बावजूद अब तक पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दान राशि में गड़बड़ी या चोरी के साक्ष्य मिले हैं तो सबसे पहले प्राथमिकी दर्ज कराई जानी चाहिए थी। एफआईआर के बाद पुलिस या अन्य जांच एजेंसियां आगे की कार्रवाई करतीं। लेकिन इस मामले में पहले आंतरिक जांच और बाद में एसआईटी गठन का रास्ता अपनाया गया है, जिस पर सवाल उठ रहे हैं।
ट्रस्ट कार्यालय में बढ़ाई गई सुरक्षा
मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट कार्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है। बताया जा रहा है कि ट्रस्ट कार्यालय के आसपास बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। वहीं ट्रस्ट से जुड़े अधिकारी फिलहाल मीडिया के सामने खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर गठित हुई एसआईटी
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया गया है। इस टीम में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज लखनऊ किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन को शामिल किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक एसआईटी केवल धन के लेन-देन की जांच तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी पता लगाएगी कि कहीं किसी स्तर पर लापरवाही, संरक्षण या मिलीभगत तो नहीं हुई। यदि जांच में किसी ट्रस्टी, पदाधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश भी की जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित लोगों के अधिकार सीमित किए जाने की भी संभावना है।
विनय कटियार ने बदला कार्यक्रम
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद विनय कटियार ने भी सख्त रुख अपनाया था। अयोध्या पहुंचने पर उन्होंने कहा था कि वह पुलिस अधिकारियों से मिलकर दोषियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराएंगे और एफआईआर की मांग करेंगे।
उन्होंने कहा था कि यदि किसी ने श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में गड़बड़ी की है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और उसे जेल भेजा जाना चाहिए। हालांकि रविवार को उनका अधिकारियों से मिलने का कार्यक्रम नहीं हो सका और वह बिना किसी औपचारिक शिकायत के लखनऊ लौट गए।
नृपेंद्र मिश्र ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने रविवार को श्रीराम जन्मभूमि परिसर का दौरा किया। उन्होंने दानपेटियों, चढ़ावा संग्रहण और धनराशि को बैंक में जमा कराने की पूरी प्रक्रिया का निरीक्षण किया।
उन्होंने रामलला के गर्भगृह में रखी दान पेटियों का भी जायजा लिया और सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए 24 घंटे के भीतर एसआईटी का गठन किया है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
विपक्ष ने उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने भी मामले को लेकर ट्रस्ट पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है।
अवधेश प्रसाद ने राज्य सरकार की एसआईटी पर भरोसा न जताते हुए मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में गठित स्वतंत्र समिति से कराने की मांग की। उन्होंने ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों को हटाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग उठाई।
ट्रस्ट कार्यालय में लगाया गया नया लॉकर
मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में ट्रस्ट भवन में अत्याधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से लैस नया लॉकर स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य दानपेटियों से प्राप्त नकदी, आभूषणों और अन्य मूल्यवान वस्तुओं को अधिक सुरक्षित तरीके से संरक्षित करना बताया जा रहा है।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की देखरेख में इस नई व्यवस्था को लागू किया गया है।
जांच पर टिकीं सभी की निगाहें
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण अब केवल एक वित्तीय जांच का मामला नहीं रह गया है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मुद्दे पर देशभर की नजरें टिकी हुई हैं। एसआईटी की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि दान राशि में वास्तव में किस स्तर पर गड़बड़ी हुई, इसके लिए कौन जिम्मेदार है और अब तक एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई।
फिलहाल सोमवार से शुरू होने वाली एसआईटी जांच को इस पूरे मामले में अहम मोड़ माना जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि यह केवल प्रशासनिक चूक थी या फिर इसके पीछे कोई बड़ा संगठित खेल छिपा हुआ है।
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लेखक के बारे में
पत्रकारिता में 17 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले शिशिर पटेल वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ में पोर्टल इंचार्ज के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ‘स्वतंत्र भारत’ से की और इसके बाद हिंदुस्तान तथा दैनिक जागरण जैसे प्रमुख समाचार पत्रों में ब्यूरो चीफ के रूप में काम किया। उत्तर प्रदेश में आधारित रहते हुए उन्हें समाचार संचालन, संपादन और डिजिटल मैनेजमेंट का व्यापक अनुभव है।
