604 करोड़ से प्राथमिक स्कूलों का होगा कायाकल्प
समग्र शिक्षा अभियान में नहीं खर्च हो पाए 9 हजार करोड़
लखनऊ। काकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में जेन जी के मुखर आंदोलन के बाद स्कूलों में खामियों को लेकर जहां तहां जेन अल्फा भी आंदोलन कर रहे हैं। वहीं विपक्षी दलों द्वारा प्राथमिक स्कूलों की बदहाल की मुद्दा बनाकर सरकार को घरेने का कार्य किया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश सरकार प्राथमिक स्कूलों के कायाकल्प करने के लिए 604 करोड़ रुपए जारी कर दिये हैं। वहीं समग्र शिक्षा अभियान के तहत केन्द्र सरकार से मिले 9 हजार करोड़ रुपये खर्च नहीं हो सके और वह लैप्स हो गये।
स्कूलों की बदहाली को लेकर आम आदमी पार्टी कई दिनों से अभियान चला रही है। इसे लेकर पार्टी के प्रदेश प्रभारी एवं सांसद संजय सिंह ने मंगलवार को यहां बताया कि योगी सरकार जबरा मारे, रोवे न दे की नीति पर चल रही है—यानी जनता को कष्ट भी देंगे और सवाल पूछने पर मुकदमा दर्ज करेंगे।
उन्होंने कहा कि आप ने स्कूलों के मर्जर का विरोध किया था, तब सरकार ने विधानसभा में दावा किया था कि कोई स्कूल बंद या मर्ज नहीं होगा। लेकिन 15 अगस्त से शुरू हुए स्कूल ठीक करो अभियान में जब जर्जर स्कूलों की असलियत सामने आई, तो प्रशासन कहने लगा कि ये स्कूल मर्ज हो चुके हैं। जबकि यू-डायस पोर्टल पर इन स्कूलों को अब भी उसी पते पर संचालित होता दिखाया जा रहा है। यानी सरकार केवल कागजों में स्कूल चला रही है।
संजय सिंह ने कहा कि जब केंद्र सरकार द्वारा समग्र शिक्षा अभियान के तहत मिले 9,000 करोड़ रुपए सरकार ने बिना खर्च किए वापस भेज दिए। तो प्रदेश के बच्चे टूटे क्लासरूम, बिना बिजली-पंखे, बिना बाउंड्री और खराब मिड-डे मील जैसी बदहाली झेलने को क्यों मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्कूलों की बदहाली, मिड-डे मील में भ्रष्टाचार और केंद्र से मिले शिक्षा फंड को खर्च न करने के मामले की संसद की याचिका समिति से जांच होनी चाहिए। हरदोई सहित कई जिलों के डीएम और बीएसए ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सच्चाई दिखाने वालों पर एफआईआर दर्ज करायी। आप नेता ने यह भी कहा कि यदि एक महीने में सुधार नहीं हुआ, तो दोबारा जमीनी स्तर पर जाकर सरकार की पोल खोली जाएगी।
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लेखक के बारे में
राजेश कुमार सिंह को पत्रकारिता एवं मीडिया क्षेत्र में 26 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से बीएससी, एलएलबी और मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है। वर्तमान में वह हिंदी दैनिक ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। राजनीतिक, प्रशासनिक और शासन से जुड़े विषयों पर उनकी गहरी समझ है।
