डीएसीपी विवाद पर बीएचयू को एनसीआईएसएम का नोटिस, 25 जून को दिल्ली में व्यक्तिगत सुनवाई
वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के आयुर्वेद संकाय में डायनेमिक एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) योजना के क्रियान्वयन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
यह पूरा विवाद आयुर्वेद शिक्षकों की पदोन्नति के लिए (डीएसीपी) योजना के नियमों और यूजीसी के दिशा-निर्देशों के बीच तकनीकी मतभेदों से जुड़ा हुआ है।
इस मामले में भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) ने बीएचयू प्रशासन को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 25 जून को नई दिल्ली स्थित आयोग मुख्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए तलब किया है।
एनसीआईएसएम की मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन (एमएआरबीआईएसएम) द्वारा 23 जून को जारी नोटिस में कहा गया है कि बीएचयू आयुर्वेद संकाय के शिक्षकों की ओर से आयोग को कई अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं। इन शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि डीएसीपी योजना को आयोग द्वारा निर्धारित नियमों एवं विनियमों का पालन किए बिना लागू किया जा रहा है।
आयोग ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 10 जून 2026 को भी बीएचयू को पत्र भेजकर डीएसीपी योजना से संबंधित विज्ञापन तत्काल वापस लेने तथा एनसीआईएसएम के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
ये खबर भी पढ़े : कोचिंग सेंटरों पर सख्ती, नई गाइडलाइन का पालन अनिवार्य नियमों की अनदेखी करने वाले संचालकों पर होगी कार्रवाईइसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने विज्ञापन वापस लेने के बजाय उसकी आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी। आयोग ने इसे अपने निर्देशों की अवहेलना माना है।
नोटिस में एनसीआईएसएम ने बीएचयू प्रशासन को निर्देश दिया है कि डीएसीपी योजना से संबंधित विज्ञापन तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
ये खबर भी पढ़े : अवैध कोचिंग संस्थानों के खिलाफ पूरे प्रदेश में जारी रहेगा विशेष अभियान : उच्च शिक्षा मंत्रीआयोग ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि योजना के अंतर्गत नियमों के विपरीत किसी प्रकार की नियुक्ति या पदोन्नति की जाती है, तो संबंधित शिक्षकों, उनके शिक्षक कोड तथा संस्थान के विरुद्ध एनसीआईएसएम अधिनियम-2020 के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय संस्थानों में डीएसीपी योजना के संचालन, शिक्षकों की पदोन्नति के लिए आवश्यक अनुभव संबंधी मानकों तथा एमएसई-2022 विनियमों के संबंध में स्पष्ट दिशानिर्देश पहले से निर्धारित हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन से इन प्रावधानों के अनुपालन को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है।
एमएआरबीआईएसएम के अध्यक्ष डॉ. मुकुल पटेल द्वारा जारी नोटिस के अनुसार बीएचयू के कुलपति अथवा कुलसचिव को 25 जून 2026 को दोपहर 2 बजे नई दिल्ली स्थित आयोग कार्यालय में सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होना होगा।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित तिथि पर अनुपस्थित रहने की स्थिति में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर एकतरफा कार्रवाई की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि बीएचयू के आयुर्वेद संकाय में डीएसीपी योजना को लेकर उठे इस विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा जगत का ध्यान आकर्षित किया है। आयोग की आगामी सुनवाई और उसके निर्णय पर शिक्षकों तथा चिकित्सा शिक्षा संस्थानों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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