बिजली निजीकरण के निर्णय के विरोध में हुई सभा
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की है की अन्य प्रांतों में विफल हो चुके विद्युत वितरण के निजीकरण के प्रयोग को देश के सबसे बड़े प्रांत उत्तर प्रदेश में न थोपा जाय। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने शुक्रवार को प्रतापगढ़ और प्रयागराज में आम सभाएं कर विद्युत वितरण के निजीकरण के विरोध में जन जागरण अभियान जारी रखा। संघर्ष समिति ने कहा है कि यदि जल्दबाजी में निजीकरण के लिए सलाहकार नियुक्त करने के लिए बिडिंग प्रक्रिया शुरू की गई तो उसी दिन बिजली कर्मी काली पट्टी बांधकर विरोध दिवस मनाएंगे।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि वर्ष 2014 में चार शहरों गाजियाबाद, मेरठ,वाराणसी और कानपुर के निजीकरण का तत्कालीन सरकार ने निर्णय लिया था। इस के लिए कंसल्टेंट नियुक्त करने के लिए बिडिंग की गई थी और मेसर्स मेकॉन को कंसल्टेंट नियुक्त किया गया था। इसके विरुद्ध नियामक आयोग में याचिका हुई।
नियामक आयोग ने अंततः यह पाया कि निजीकरण का पीपीपी मॉडल जनहित में नहीं है। सरकार को यह समझ आ गया कि निजीकरण के विफल प्रयोग को उप्र में लागू करने से कोई लाभ नहीं है और सरकार ने निजीकरण का निर्णय वापस लिया। संघर्ष समिति ने कहा कि दस साल बाद फिर वही प्रक्रिया प्रारंभ करने और अनावश्यक तौर पर कंसल्टेंट पर पैसा खर्च करने का कोई औचित्य नहीं है।
संघर्ष समिति ने एक बार पुनः कहा कि बिजली कर्मियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा विश्वास है और उनके नेतृत्व में लगातार सुधार हो रहा है। वर्ष 2016-17 में 41 प्रतिशत ए टी एंड सी हानियां थीं जिन्हें घटाकर वर्ष 2023-24 में 17 प्रतिशत कर दिया गया है। एक वर्ष बाद राष्ट्रीय मानक 15 प्रतिशत से कम ए टी एंड सी हानियां हो जाएंगी। निजीकरण के विरोध में जन जागरूकता अभियान के तहत संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने आज प्रतापगढ़ और प्रयागराज में आम सभा की। प्रयागराज में पांच जनवरी को बिजली पंचायत आयोजित की गई है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
