सोनभद्र में एससी-एसटी भूमि मामले पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
धर्मांतरण के बाद एससी-एसटी से खरीदी 30 जमीनों की प्रशासन ने ग्राम सभा में किया था निहित, हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन की कार्रवाई को ठहराया जायज
सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के जनपद सोनभद्र की दुद्धी तहसील की बघाड़ूं गांव निवासी अनुसूचित जनजाति की महिला ने एक मुस्लिम बहादुर अली से निकाह व धर्मान्तरण के बाद लैंड जिहाद के तहत अनुसूचित जाति की 30 से अधिक जमीनों की खरीदी थी, जिसे बाद में पति बहादुर अली ने यह जमीनें झारखंड, बिहार व छत्तीसगढ़ में रहने वाले अपने रिश्तेदारों को दे दिया था जिसे जिला प्रशासन ने धर्मांतरण के बाद जालसाजी कर खुद को अनुसूचित जनजाति का दर्शाते हुए कराए गए सभी बैनामों को शून्य घोषित कर भूमि को ग्राम सभा में निहित किया था।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अनुसूचित जनजाति की महिला के मुस्लिम बहादुर अली से निकाह एवं धर्मांतरण के बाद जनजातीय समाज से खरीदी गई भूमि के विरुद्ध जिला प्रशासन की कार्रवाई को जायज करार देते हुए किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से इनकार कर दिया है।
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि झारखंड की सीमा से सटे दुद्धी के बघाड़ू गांव में आदिवासियों की जमीनों पर बहादुर अली द्वारा पत्नी के नाम पर जालसाजी कर हड़पने का प्रकरण संज्ञान में आने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की। बताया कि बहादुर अली ने जनजातीय समाज की महिला रजिया से निकाह के पश्चात दस्तावेजी हेरफेर कर उसे जनजातीय समाज का ही दर्शाते हुए एससी-एसटी की 30 से अधिक जमीनों की खरीद की थी। बाद में बहादुर अली ने यह जमीनें झारखंड, बिहार व छत्तीसगढ़ में रहने वाले अपने रिश्तेदारों को दे दीं। जिला प्रशासन ने मास्टरमाइंड बहादुर अली द्वारा जालसाजी कर पत्नी रजिया की पुरानी पहचान पर एससी-एसटी समाज द्वारा कराए गए सभी बैनामों को शून्य घोषित कर 40 गाटों की 5.7142 हेक्टेयर भूमि को ग्राम सभा में निहित कर दिया था।
जिलाधिकारी ने बताया कि जिला प्रशासन की कार्रवाई के विरुद्ध रजिया ने अप्रैल माह में उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। जहां प्रकरण पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार की पीठ ने जिला प्रशासन के बैनामों को कानूनन शून्य घोषित कर विवादित जमीनों को ग्राम सभा में निहित करने के आदेश को सही ठहराते हुए किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अमल करते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करने के साथ ही उच्च न्यायालय में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित की जिससे 5 माह से भी कम समय में ही न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब 03 वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट एडिटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
