सरोजनी नगर के कई विद्यालय आपातकालीन शिक्षा संकट से गुजर रहे
शिक्षकों ने पत्र के माध्यम से उच्च अधिकारियों को इस घोर संकट से अवगत कराया
राहुल सिंह यादव
- जनगणना और बीएलओ की ड्यूटी ने छीनी बच्चों की शिक्षा
लखनऊ। सरोजनी नगर क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत सरकारी दावों से बिल्कुल उलट है। एक ओर योगी सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के तमाम विद्यालय शिक्षक संकट के दौर से गुजर रहे हैं और गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ तले दबे हुए हैं। शिक्षक अपनी पीड़ा लगातार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर बयां कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को शिक्षकों की समस्याओं से कोई खास सरोकार नजर नहीं आ रहा। निर्देश जारी हो रहे हैं, मगर जमीनी समाधान अब तक नहीं दिख रहा है।
ताजा मामला सरोजनी नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय अलीनगर खुर्द, अशरफ नगर, बिजनौर और मिरानपुर पिनवट से सामने आया है, जहां शिक्षकों द्वारा भेजे गए पत्रों ने शिक्षा व्यवस्था की सच्चाई सामने रख दी है। इन विद्यालयों का लगभग पूरा स्टाफ जनगणना और बीएलओ ड्यूटी में लगा दिया गया है, जिससे विद्यालय संचालन और बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
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विभागीय सूत्रों के अनुसार इस आपात स्थिति को देखते हुए शिक्षकों ने खंड शिक्षा अधिकारी को पत्र के माध्यम से अवगत कराया है कि विद्यालय का पूरा स्टाफ जनगणना और बीएलओ कार्य में लगा दिया गया है विद्यालय के शिक्षा मित्र सप्ताह में दो दिन ड्यूटी के कारण स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। अब स्वयं इंचार्ज अध्यापिका की भी जनगणना ड्यूटी लगाए जाने से विद्यालय संचालन संकट में आ गया है। जिससे छोटे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है
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इसी तरह बिजनौर बेसिक विद्यालय से भी एक शिक्षिका ने पत्र लिखकर अपनी पीड़ा जाहिर की है। उन्होंने बताया कि विद्यालय का समस्त स्टाफ अध्यापक, अनुदेशक और शिक्षा मित्र जनगणना ड्यूटी में तैनात है। ऐसे में शिक्षकों के सामने विद्यालय संचालन और प्रशासनिक कार्यों का दोहरा दबाव बन गया है। एक तरफ सरकारी जिम्मेदारियां निभाने का दबाव है तो दूसरी ओर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की चिंता।
अशरफ नगर और मिरानपुर पिनवट का भी यही हाल तरुण मित्र की टीम ने भ्रमण के दौरान पाया देखा कि क्षेत्र के अशरफ नगर और मिरानपुर पिनवट के विद्यालयों से भी इसी तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। सीमित स्टाफ वाले इन विद्यालयों में पहले से ही शिक्षक संख्या कम है। ऊपर से जनगणना और बीएलओ जैसी जिम्मेदारियों ने शैक्षणिक व्यवस्था को और कमजोर कर दिया है। कई विद्यालयों में बच्चों की नियमित कक्षाएं बाधित हो रही हैं।
पहले एसआईआर, अब जनगणना ने बढ़ाई मुश्किलें
अभिभावकों का कहना है कि सरकार शिक्षा के नाम पर बड़े-बड़े दावे करती है और "पढ़ेगा इंडिया, बढ़ेगा इंडिया" जैसे नारे देती है, लेकिन जमीनी स्तर पर शिक्षक लगातार गैर-शैक्षणिक कार्यों में उलझे हुए हैं। पहले एसआईआर और अब जनगणना कार्यों ने बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ भविष्य पर भी असर पड़ रहा है
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
