अहम हुए ब्राह्मण मतदाता, रस्साकसी तेज, सपा करेगी ब्राह्मण सम्मेलन
भाजपा, सपा ही नहीं बसपा कांग्रेस दे रहे खास तरजीह
देवरिया में पूर्व सांसद के घर पहुंचे सीएम
लखनऊ। देश के सबसे सूबे उत्तर प्रदेश में अगले कुछ ही माह में विधानसभा चुनाव संभावित है। इस चुनाव में फतह के लिए सयासी पार्टियों की चाक चौबंद तैयारी के बीच जतीय गोलबंदी भी शुरू हो गयी है। 2027 में बीजेपी का लक्ष्य हैट्रिक लगाने का है। ऐसे में ब्राह्मण समाज बेहद खास हो गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुछ ही दिनों में देवरिया का दौरा दो बार करने के साथ ही पूर्व सांसद के घर जाना नहीं भूले। वहीं सपा ब्राह्मण सम्मेलन करने जा रही है। कांग्रेस एवं बसपा भी इस वोट को साधने के लिए दिन रात एक किये हुए है।
सूबे की सियासत हो या फिर समाज की सक्रियता इन दिनों ब्राह्मण मतदाता अहम हो गये है। प्रदेश में इनकी आबादी करीब 12 प्रतिशत है। वर्तमान में 52 विधायक यूपी विधानसभा की शोभा बढ़ा रहे हैं। प्रदेश सरकार के मंत्रिमण्डल में 10 मंत्री इस समाज से है। सत्तासीन बीजेजी के प्रदेश संगठन में भी कुल 60 पदाधिकारियों में इनकी संख्या 13 है। इसी तरह प्रदेश में कुछ 80 सासंदो में इनकी संख्या 8 है। इस वोट बैेक के लिए सियासी दलों के बीच रस्साकसी तेज हो गयी है। देवरिया के पूर्व सांसद सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी और मुख्यमंत्री की मुलाकात पर चर्चा तेज हो गयी है। को सियासी जानकार इसी नजरिए से देख रहे हैं। सीएम योगी ने हाल में देवरिया में जनसभा की थी और श्रीप्रकाश मणि के आवास पर पहुंच गए। इसके पीछे ब्राह्मण समाज को अहमियत का संदेश बताया जा रहा है। क्योंकि यह भी चर्चा है कि यह समाज सरकार से कुछ असहज है।
ये खबर भी पढ़े : पंडित दीनदयाल उपाध्याय महा प्रशिक्षण अभियान के अंतर्गत डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म मंडल कार्यशाला संपन्नश्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद देवरिया से 1996 और 1999 में भाजपा के सांसद रहे। भाजपा ने 2024 के चुनाव में देवरिया सदर से सीटिंग एमपी डॉ. रमापति राम त्रिपाठी का टिकट काट शशांक मणि त्रिपाठी पर दांव लगाया था। भाजपा पूर्वांचल समेत यूपी में सपा से पिछड़ गई लेकिन शशांक मणि ने देवरिया सीट जीती। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब मुख्य विपक्षी पार्टी सपा जनेश्वर मिश्रा की जयंती पर ब्राह्मण सम्मेलन करने जा रही है।
श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी के परिवार की प्रतिष्ठा न सिर्फ देवरिया के ब्राह्मण समाज में है बल्कि पूरे पूर्वांचल में है। 34 दिनों के अंदर सीएम योगी का दो बार देवरिया पहुंचे। उन्होंने जिले को करीब 1600 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की सौगात दी। पार्टी ने 2022 में जिले की सभी सातों सीटों पर जीत दर्ज कर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था। 2017 में देवरिया ने 7 में 6 सीटें भाजपा की झोली में डाल दी थी। लेकिन 2022 में वो भी बीजेपी के खाते में आई । इस तरह 2017 और 2022 में भाजपा की जीत में अहम भूमिका ब्राह्मण मतदाताओं की रही है। पिछले कुछ समय से ब्राह्मण समाज और भाजपा को लेकर तरह तरह की चचार्एं और अटकलें लगाई जा रही हैं।
लखनऊ में भाजपा के ब्राह्मण समाज के विधायकों के बाटी चोखा सहभोज ने असहज किया था। इसे लेकर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ंने इस भोज का आयोजन करने वाले को फटकार लगाते हुए नोटिस भी जारी कर दी। कुल मिलाकर मिशन 2027 को लेकर हर दल की नजर ब्राह्मण मतदाताओं पर टिकी है। हर कोई अपने पाले में लाने को बेताब है। बीएसपी तो पहले से ही ब्राह्मणों पर ध्यान देती आई है। पार्टी ने सर्वसमाज की बैठकें आरंभ कर दी है। सपा भी ब्राह्मणों की वकालत कम नही कर रही है। सपा भी ब्राह्मण सम्मेलन करने जा रही है।
पीडीए की बैठकों में ब्राह्मण समाज के उत्पीड़न का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जा रहा है। कांग्रेस ने भी ब्राम्हण नेताओं को सजातीय बैठक करने के लिए निर्देश दे दिये है। ब्राम्हण समाज हमेशा ट्रेंड सेंटर की भूमिका में रहा है। अपने समाज के साथ ही अन्य जातियों पर भी इसका होल्ड रहता है। यह समाज जिसके साथ जाता है उसी के पास सत्ता रहती है। सपा के राष्ट्रीय सचिव अभिषेक मिश्र ने बताया कि इस सरकार सबसे अधिक ब्राम्हण समाज का उत्पीड़न हुआ है। इसका पूरा ब्यौरा तैयार किया जा रहा है जिसे लेकर पार्टी जन जागरकता अभियान चलायेगी। पीडीएम एवं ब्राम्हण सम्मेलन में इस समाज की उपेक्षा पर चर्चा की जायेगी।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
