राज्य संग्रहालय में खुशियों की पाठशाला,बच्चों ने सीखी पारंपरिक कला
लखनऊ। स्थित राज्य संग्रहालय में उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित 'खुशियों की पाठशाला' ग्रीष्मकालीन इंटरएक्टिव गतिविधियों के तहत ब्लॉक प्रिंटिंग कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में रचनात्मकता, कलात्मक अभिरुचि और भारतीय पारंपरिक कला विधाओं के प्रति जागरूकता विकसित करना था।
इस कार्यशाला में सिटी मोंटेसरी स्कूल और लखनऊ पब्लिक स्कूल के 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के कुल 61 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने ब्लॉक प्रिंटिंग की विभिन्न तकनीकों को सीखा और अपनी कल्पनाशीलता का प्रदर्शन किया।
रंगों और पारंपरिक डिज़ाइनों से सजी उनकी कलाकृतियों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षकों ने विद्यार्थियों को ब्लॉक प्रिंटिंग की बारीकियों से अवगत कराया। बच्चों ने कपड़ों और कागज़ पर विभिन्न प्रकार के डिज़ाइनों की छपाई कर पारंपरिक भारतीय हस्तकला के प्रति अपनी रुचि दिखाई। गतिविधि के दौरान विद्यार्थियों में सीखने और कुछ नया करने का उत्साह स्पष्ट रूप से देखा गया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर राज्य संग्रहालय के निदेशक डॉ. विनय कुमार सिंह ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए।
ये खबर भी पढ़े : नगर निगम के डम्पर और टैक्सी में भीषण टक्कर, टैक्सी को काटकर चालक को सुरक्षित निकालाउन्होंने बच्चों की रचनात्मक प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ये कार्यक्रम नई पीढ़ी को भारतीय कला, संस्कृति और विरासत से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं। इस कार्यक्रम का समन्वय सहायक निदेशक (सज्जा कला) डॉ. मीनाक्षी खेमका के निर्देशन में किया गया। राज्य संग्रहालय प्रशासन ने जानकारी दी कि भविष्य में भी बच्चों और युवाओं के लिए इसी प्रकार की शैक्षिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन जारी रहेगा।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
