श्रीकृष्ण जन्माष्टमी : धर्म की स्थापना के लिए भगवान श्री कृष्ण ने लिया अवतार
मनोज शर्मा, बाराबंकी संवाददाता
बाराबंकी। जब-जब इस पृथ्वी पर पाप बढ़ते हैं धर्म का नाश होता है अधर्म का बोलबाला होता है तब तब धर्म की स्थापना के लिए कोई न कोई ईश्वरीय शक्ति पृथ्वी पर अवतरित होकर आताताई शक्तियों का समूल विनाश करके धर्म की स्थापना करती है । इसी श्रृंखला में भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लेकर रांक्षसी शक्तियों शक्तियों का दमन कर लोगों को अमनचैन की जिंदगी देने का भरसक प्रयास किया जिनका संपूर्ण जीवन दर्शन आज भी मानव के मध्य में प्रसांगिक बना हुआ है।
कहा जाता है कि द्वापर युग में मथुरा नरेश कंश का अत्याचार जब अपनी चरम सीमा पर बढ़ गया चारों ओर उथल - पुथल मच गई तब सारे देवता भगवान विष्णु की शरण में गए देवताओं ने कंश के अत्याचारों की सारी कहानी सुनाई तो भगवान विष्णु ने सभी अंशो के साथ मथुरा के कारागार में कंस की बहन देवकी के समक्ष भादो महीने में कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि को अवतार लिया जब भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ तो उस समय आकाश में काली काली घटाएं घिरी हुई थी।
भगवान श्रीकृष्ण के चतुर्भुज रूप को देखकर माता देवकी और वसुदेव की खुशी का ठिकाना नहीं रहा परंतु कंश के अत्याचारों की याद आते ही वे भयभीत हो गए बाद में भगवान श्रीकृष्ण ने शिशु रूप को धारण कर लिया आकाशवाणी हुई कि मुझे नंद बाबा के घर में भेज दो तत्पश्चात वसुदेव जी भगवान श्री कृष्ण को लेकर नंद बाबा के यहां गए और वहां से तुरंत उत्पन्न हुई कन्या को उठा मथुरा कारागार को ले आए वहां आने पर कन्या रोने लगी कन्या का रोना सुनकर पहरेदारी ने जागकर पुत्र होने की सूचना कंस को दिया कंश ने ज्यो ही कन्या को उठाकर मारना चाहा कन्या हाथ से छूट गई और आकाश में चतुर्भुजी देवी के रूप में प्रकट हो गई।
आकाशवाणी हुई की हे दुष्ट कंस तुझे मारने वाला ब्रज मंडल में पैदा हो गया तुरंत कंस ने श्रीकृष्ण का वध करने के लिए पूतना अघासुर और बकासुर जैसे तमाम राक्षसों को भेजा बचपन में ही भगवान श्रीकृष्ण ने सभी का वध कर दिया बड़े होकर अपने मामा कंस का वध करके लोगों को अमन चैन की जिंदगी देने का भरसक प्रयास किया महाभारत के युद्ध में आपने सक्रिय भूमिका का निर्वहन किया अर्जुन को मोह उत्पन्न होने पर उन्हें गीता का उपदेश दिया आप योगेश्वर श्रीकृष्ण कहलाए आपके द्वारा बताए गए श्लोको में एक-एक मंत्र प्राणी मात्र के लिए विधिग्राह्य है जिनका अनुसरण करके मानव परम पद को प्राप्त कर सकता है इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण का संपूर्ण जीवन दर्शन आज भी मानव के मध्य में प्रासंगिक बना हुआ।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
