इंदिरानगर-महानगर पर इंद्रदेव मेहरबान, बाकी शहर वासी परेशान!
मानसूनी बारिश की लुकाछिपी में कहीं गर्मी से राहत तो कहीं आफत
- बुधवार को दोपहर बाद ट्रांस-गोमती में हुई जमकर बारिश, सदर बाजार में सूखा
- काफी दिनों से अन्य क्षेत्रों के मुकाबले इंदिरानगर क्षेत्र में पहले होती है बूंदाबांदी
- पर्यावरणविदों की माने, क्षेत्र में कुकरैल वन रेंज के चलते ग्रीन बेल्ट ज्यादा तो रुकते हैं बादल
लखनऊ। बुधवार का दिन, समय दोपहर के तीन बजे होंगे और ऊपर आसमान साफ ही दिखायी दे रहा था कि अचानक बादल उमड़ते नजर आने लगे, और फिर कुछ ही देर में बूंदाबांदी का दौर शुरू हो गया। जबकि ज्यादातर सड़कों पर निकले लोग यही सोच रहे थे कि अभी तो फिलहाल बारिश नहीं होगी, लेकिन कहते हैं न कि आज मौसम बड़ा बेईमान है, मगर यहां तो ज्यादातर लखनऊ वासियों को अब यही महसूस होने लगा है कि आजकल इंद्रदेव कहीं न कहीं और किसी न किसी रूप में इंदिरानगर व महानगर और इसके आसपास के इलाकों पर कहीं ज्यादा मेहरबान हैं, क्योंकि बीते कुछ दिनों से यही देखने में आ रहा कि लखनऊ शहर में अन्य क्षेत्रों के मुकाबले इन दोनों इलाकों में कहीं ज्यादा बारिश होती दिख रही।
इतना ही नहीं अधिकांश दिनों में इस मानसूनी बारिश के दौर में यही देखने में आया कि जिस दिन भी बरसात शुरू हुई तो उसका शुभारंभ पहले इन उपरोक्त दोनों क्षेत्रों में हुआ और उसके बाद कहीं जाकर छिटपुट बारिश अन्य शहर के इलाकों में हुई।
अबकी बुधवार को भी कुछ ऐसी ही स्थितियां देखने को मिली, एक ओर जहां ट्रांस-गोमती के इन दोनों इलाकों और आसपास के आवासीय कॉलोनियों में जहां ठीकठाक बारिश हुई तो वहीं दूसरी तरफ गोमती नदी पार के इलाकों में सदर बाजार और अन्य कई क्षेत्रों में पूरी तरह सूखा रहा। वहीं इसके पीछे की वजह जानने की कोशिश की गयी तो कुछ प्रमुख पर्यावरणविदों का यही कहना रहा सारा मामला केवल और केवल हरियाली और पेड़ पौधे बाहुल्य वाले इलाके का है।
आगे बताया कि इंदिरानगर क्षेत्र में एक तो कुकरैल वन रेंज का एक बड़ा ग्रीन बेल्ट स्थित है और वहां पर ज्यादातर जो आवासीय कॉलोनियां हैं वहां पर भी पौधरोपण आदि का ध्यान रखा गया है तो ऐसे में बारिश कराने वाले बादल जब आसमान में उमड़ना शुरू करते हैं तो इन हरियाली बेल्ट के चलते इन क्षेत्रों में कहीं ज्यादा ठहराव लेते हैं और फिर अन्य क्षेत्रों की तुलना में यहां पर कहीं अधिक बारिश होती है।

जबकि गोमती पार मेन लखनऊ यानी पुराने लखनऊ हजरतगंज से लेकर चारबाग, अमीनाबाद, कैसरबाग, चौक, नक्खास, राजाजीपुरम आदि इलाकों में जनसंख्या की डेन्सिटी काफी अधिक है, और ज्यादातर मकान एकदूसरे से सटे हैं और पौधरोपण का तो ज्यादातर क्षेत्रों में नामोनिशां तक नहीं है तो ऐसे में कहां से बारिश कराने वाले बादल यहां पर ठहरेंगे और लोगों को कैसे बेहाल करने वाली गर्मी से राहत दे पायेंगे।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
