एक्सक्लूसिव स्तनपान के लिए दो बच्चों में तीन साल का अंतर जरूरी:डॉ अंजू
— स्तनपान से बच्चे को डायरिया,निमोनिया, संक्रमण से बचाया जा सकता: डॉ एसएन सिंह

लखनऊ। एक्सक्लूसिव स्तनपान को बढ़ावा देने के लिए सभी 120 सिक न्यू बार्न केयर यूनिट ,एसएनसीयू पर इस साल के अंत तक लैक्टेशन मैनेजमेंट यूनिट ,एलएमयू स्थापित हो जाएंगे। फिलहाल 34 एसएनसीयू में एलएमयू सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं जिनके माध्यम से 11 हजार से ज्यादा नवजात शिशु लाभान्वित हुए हैं। 36 अन्य एसएनसीयू में स्टाफ को प्रशिक्षित किया जा चुका है। वे भी जल्द काम करने लगेंगे। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के महाप्रबंधक डॉ मिलिंद वर्धन ने कही।
डॉ मिलिंद ने कहा कि बीते तीन-चार साल में एक्सक्लूसिव स्तनपान का 60 प्रतिशत से 35 प्रतिशत होना चिंता का विषय है और प्रदेश सरकार ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है। हर बच्चे को मां का दूध मिले, इसके लिए सभी एसएनसीयू में एलएमयू शुरू करने का फैसला किया गया है और इसके शुरुआती फायदे भी दिख रहे हैं। अप्रैल से जुलाई के मध्य 11 हजार से ज्यादा नवजात शिशु इससे लाभांवित हुए हैं।
केजीएमयू के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ एसएन सिंह ने कहा कि बच्चों को स्कूली शिक्षा से स्तनपान के बारे में जानकारी दी जाए व लोगों को स्तनपान के फायदे बताए जाएं तो उनकी सोच बदलेगी। उन्होंने बताया कि एक्सक्लूसिव स्तनपान करने वाला बच्चा डायरिया, निमोनिया, संक्रमण जैसी बीमारियों से बच जाता है। उसकी आंतें मजबूत होती हैं। उन्होंने बताया कि माँ का दूध बच्चे के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए बहुत अहम है इसलिए शिशु को यहां तक कि ऑपरेशन के हुए बच्चों को भी मां के सम्पर्क में लेकर स्तनपान कराना चाहिए।
केजीएमयू की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ अंजू अग्रवाल ने कहा कि बच्चे को एक्सक्लूसिव स्तनपान कराने के लिए जरूरी है कि दो बच्चों में तीन साल का अंतर रहे। तभी मां पहले बच्चे को दो साल तक ध्यान लगाकर स्तनपान करा पाएगी। आईसीडीएस की डिप्टी डायरेक्टर डॉ अनुपमा शांडिल्य ने बताया कि उनके विभाग की 1.84 लाख आंगनबाड़ी कार्यकत्री व लगभग इतनी ही सहायिकाएं ग्रामीण स्तर पर स्तनपान की महत्ता के बारे में जागरूकता फैला रहे हैं।
मेदांता के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ आकाश पंडिता ने आईएमएस एक्ट के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि एक्ट दो साल तक के बच्चों के लिए विपणन किए जाने वाले खाद्य पदार्थों के किसी भी रूप में प्रचार पर व्यापक प्रतिबंध लगाता है। यह शिशु फार्मूला कंपनियों द्वारा स्वास्थ्य पेशेवरों और स्वास्थ्य संगठनों को प्रायोजित करने पर भी प्रतिबंध लगाता है।
यूनिसेफ के न्यूट्रीशन विशेषज्ञ रबि नारायन परही ने बताया कि स्तनपान हर बच्चे का अधिकार है। कार्यालयों, संस्थानों को इस बारे में संवेदनशील करने की ज़रूरत है ताकि कामकाजी महिलाएं अपने बच्चों को समुचित स्तनपान करवा पाएं।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
