केजीएमयू: मेनोपॉज: द एजलेस केयर जर्नी पर चर्चा
— होलिस्टिक मैनेजमेंट और क्लिनिकल अपडेट्स ” पर सीएमई

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी डिपार्टमेंट ने शनिवार को “ मेनोपॉज: द एजलेस केयर जर्नी – होलिस्टिक मैनेजमेंट और क्लिनिकल अपडेट्स ” पर एक कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन सीएमई प्रोग्राम ऑर्गनाइज किया। इसका मकसद मेनोपॉज के होलिस्टिक मैनेजमेंट के लिए क्लिनिकल अपडेट्स और एविडेंस-बेस्ड अप्रोच देना था। सीनियर फैकल्टी और कंसल्टेंट्स ने डायग्नोसिस,प्रिवेंशन और ट्रीटमेंट स्ट्रेटेजी पर लेटेस्ट इनसाइट्स शेयर कीं। प्रो.रेखा सचान ने बताया कि मेनोपॉज को “ आखिरी पीरियड के 12 महीने बाद ” बताया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि एचआरटी 45-55 साल की उम्र में सबसे ज़्यादा फायदेमंद है और इसे इस उम्र के बाद जारी नहीं रखना चाहिए। मेनोपॉज में हर्ब्स और मसालों की भूमिका, लक्षणों को मैनेज करने के लिए इंटीग्रेटेड और लाइफस्टाइल तरीकों पर ज़ोर दिया।
डॉ. मंजुलता वर्मा ने बोन हेल्थ और बचाव के पहलुओं में अपडेट्स पर बात की। उन्होंने बताया कि डेक्सा स्कैन से बोन मिनरल डेंसिटी बोन हेल्थ का पता लगाने का गोल्ड स्टैंडर्ड है।
डॉ. सोनिया लूथरा-प्रोफेसर बताया ने मेनोपॉज़ के लक्षणों में डायग्नोस्टिक अपडेट्स पर चर्चा की। उन्होंने मेनोपॉज के शारीरिक लक्षणों और एचआरटी शुरू करने का फैसला करने में उनकी भूमिका पर ज़ोर दिया। लक्षणों की जल्दी पहचान से समय पर इलाज में मदद मिलती है।
डॉ. शालिनी सिंह ने मेनोपॉज़ में कार्डियोवैस्कुलर और यूरोजेनिटल हेल्थ पर बात की। उन्होंने कहा कि एचआरटी के कार्डियोवैस्कुलर फायदे सिर्फ़ 50-59 साल की उम्र में ही देखे जाते हैं। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि *इस मामले में प्रोजेस्टेरोन का कोई खास रोल नहीं है । प्रोग्राम में फैकल्टी मेंबर्स, रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। डिपार्टमेंट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मेनोपॉज के दौरान महिलाओं की हेल्थ और जीवन की क्वालिटी को बेहतर बनाने के लिए इस तरह की एकेडमिक पहल बहुत ज़रूरी हैं।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
