वीरांगना अवंती बाई अस्पताल में अंतरा–एससी तकनीकी की शुरुआत
अंतरा–एससी को “बास्केट ऑफ चॉइस” में किया शामिल
इंजेक्शन बंद करने के सात से दस माह के भीतर गर्भधारण संभव:डॉ. रेनू पंत
लखनऊ। वीरांगना अवंतीबाई जिला महिला अस्पताल में अस्थायी परिवार नियोजन के तहत त्रैमासिक गर्भनिरोधक इंजेक्शन अंतरा की नई तकनीक अंतरा–सबक्यूटेनियस (त्वचा के नीचे,एससी) का शुभारम्भ बुधवार को प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ.ज्योति मल्होत्रा ने लाभार्थी को इंजेक्शन लगाकर किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि अंतरा–एससी को “ बास्केट ऑफ चॉइस ” में शामिल किया गया है। यह एक अस्थायी गर्भनिरोधक साधन है, जिसे प्रत्येक तीन माह पर लगाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले दिया जाने वाला अंतरा (इंट्रामस्कुलर) इंजेक्शन मांसपेशियों में लगाया जाता था, जो अब भी उपलब्ध है और आगे भी जारी रहेगा। दोनों तकनीकों के बीच अंतर बताते हुए उन्होंने कहा कि अंतरा–एससी अपेक्षाकृत कम दर्द वाला है और इसकी डोज भी कम होती है। जहां अंतरा-इंट्रामस्कुलर की मात्रा एक मिली होती थी, वहीं अंतरा–एससी केवल 0.6 मिली में दिया जाता है। साथ ही इसका अवशोषण भी बेहतर होता है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन महिलाओं को पहले से अंतरा-इंट्रामस्कुलर लगाया जा चुका है,उन्हें वही इंजेक्शन आगे भी दिया जाएगा,जबकि अंतरा–एससी नए लाभार्थियों के लिए उपलब्ध रहेगा।
कौन ले सकता है लाभ:
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रेनू पंत ने बताया कि—
माहवारी के एक से सात दिन के भीतर,प्रसव के बाद स्तनपान कराने वाली महिलाएं (प्रसव के 6 सप्ताह बाद),प्रसव के बाद स्तनपान न कराने वाली महिलाएं (प्रसव के 4 सप्ताह बाद),गर्भपात के तुरंत बाद उन्होंने बताया कि यदि कोई महिला गर्भधारण करना चाहती है,तो इंजेक्शन बंद करने के सात से दस माह के भीतर गर्भधारण संभव है। कार्यक्रम के पहले दिन कुल तीन महिला लाभार्थियों को अंतरा–एससी की डोज दी गई। इस अवसर पर चिकित्सक डॉ. रंजना प्रसाद, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सलमान खान , परिवार कल्याण परामर्शदाता सरिता शुक्ला सहित नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित रहे।
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लेखक के बारे में
शुभम कश्यप को पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की शिक्षा प्राप्त की है और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं। उनकी विशेषज्ञता चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी खबरों और अस्पताल आधारित रिपोर्टिंग में है, जहाँ वह विषयों को तथ्यपरक, सटीक और जिम्मेदार ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
