हाई कोर्ट: प्रधानाध्यापिका के तबादला आवेदन पर 6 सप्ताह में लें निर्णय
नैनीताल। उच्च न्यायालय ने टिहरी गढ़वाल के नरेंद्रनगर के डिगवाली स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय में 28 वर्षों से तैनात प्रधानाध्यापिका के तबादले के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के आवेदन पर छह सप्ताह के भीतर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर निर्णय लें।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार नीलू रावत ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि वह वर्तमान में राजकीय प्राथमिक विद्यालय डिगवाली में प्रधानाध्यापिका के पद पर कार्यरत हैं। यह विद्यालय पहले दुर्गम श्रेणी में था, लेकिन अब इसे सुगम श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उनका परिवार देहरादून में रहता है। उनकी 80 वर्षीय सास गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। इस आधार पर उन्होंने उत्तराखंड वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम, 2017 की धारा 27 के तहत अनुरोध के आधार पर स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था।
याचिकाकर्ता की ओर से यह आवेदन 17 सितंबर को उचित माध्यम से भेजा गया था। याचिकाकर्ता की ओर से न्यायालय से अनुरोध किया गया कि लंबे समय से एक ही विद्यालय में तैनाती तथा वृद्ध सास की बीमारी को देखते हुए स्थानांतरण आवेदन पर निर्धारित समय में निर्णय लेने के निर्देश दिए जाएं।
कोर्ट ने याचिका को निस्तारित करते हुए प्राथमिक शिक्षा निदेशक देहरादून या स्थानांतरण अधिनियम के तहत सक्षम प्राधिकारी को निर्देश दिया कि 17 सितंबर के स्थानांतरण आवेदन पर आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तारीख से छह सप्ताह के भीतर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर निर्णय लिया जाए।
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हर्षित साहू पिछले करीब 03 वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट एडिटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
