मीडिया की निष्पक्षता को लेकर बढ़ता अविश्वास चिंताजनक, आत्ममंथन भी जरूरी : रामनाथ सिंह
पत्रकारों की सुरक्षा लोकतंत्र की मजबूती का आधार, उन पर हमला राष्ट्रीय चिंता का विषय
- पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र की उस मूल भावना को कमजोर करता
बिजनौर। उत्तर प्रदेश एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट के जिला महामंत्री एवं लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) मुरादाबाद मंडल के महासचिव रामनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी आंदोलन की वास्तविक ताकत उसकी संख्या से नहीं, बल्कि उसके अनुशासन, आचरण और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के पालन से तय होती है। यदि किसी विरोध-प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों पर हमला होता है, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि यह भी एक वास्तविकता है कि समाज के एक वर्ग में मीडिया की निष्पक्षता को लेकर असंतोष और अविश्वास बढ़ा है। अनेक लोगों को लगता है कि उनकी आवाज़ को पर्याप्त स्थान नहीं मिलता या घटनाओं का प्रस्तुतिकरण संतुलित ढंग से नहीं किया जाता। ऐसे मुद्दों पर मीडिया संस्थानों को भी समय-समय पर आत्ममंथन करना चाहिए और जनविश्वास को मजबूत बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारियों का निष्पक्षता से निर्वहन करना चाहिए।
रामनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी प्रकार की असहमति का समाधान हिंसा नहीं हो सकता। पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र की उस मूल भावना को कमजोर करता है, जिसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संवाद और जवाबदेही सर्वोच्च स्थान रखते हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आंदोलन का अधिकार भी सुरक्षित रहना चाहिए और स्वतंत्र पत्रकारिता का सम्मान भी। दोनों के बीच उत्पन्न मतभेदों का समाधान केवल संवाद, तथ्य, संवैधानिक मर्यादाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के दायरे में ही संभव है। यही एक परिपक्व, जिम्मेदार और मजबूत लोकतंत्र की पहचान है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
