पीएम मोदी ने सुभाषित के माध्यम से बताया शुभ विचार, वाणी और कर्म का महत्व
मोदी ने देशवाशियो को दिया बड़ा संदेश
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए जीवन में शुभ विचारों, मधुर वाणी और श्रेष्ठ कर्मों को अपनाने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जिन विचारों, शब्दों और कर्मों का निरंतर अभ्यास करता है, अंततः वही उसके व्यक्तित्व और जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि
"कर्मणा मनसा वाचा यदभीक्ष्णं निषेवते।
तदेवापहरत्येनं तस्मात् कल्याणमाचरेत्॥"
इस सुभाषित का अर्थ है कि मनुष्य अपने कर्मों, विचारों और वाणी के माध्यम से जिस प्रवृत्ति का बार-बार अनुसरण करता है, उसका प्रभाव धीरे-धीरे उसके स्वभाव और चरित्र पर पड़ता है। अंततः वही उसके व्यक्तित्व को आकार देता है और उसे उसी दिशा में अग्रसर करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने विचारों में सकारात्मकता, अपनी वाणी में मधुरता और अपने कर्मों में लोककल्याण की भावना को स्थान देना चाहिए। जीवन में कल्याणकारी आचरण अपनाने से न केवल व्यक्ति का चरित्र सुदृढ़ होता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण निर्माण में भी उसकी सकारात्मक भूमिका सुनिश्चित होती है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
