ग्रामीण बैंक का असिस्टेंट मैनेजर एआई की मदद से सॉल्व करवा रहा था पेपर
असिस्टेंट बैंक मैनेजर सहित दस आरोपी हुए गिरफ्तार
पांच लाख बीस हजार में होता था सौदा
लखनऊ। मंगलवार बिजनौर पुलिस ने आईबीपीएस के पेपर में धांधली करने वाले गैंग को गिरफ्तार किया है। इस गैंग का सरगना ग्रामीण बैंक का असिस्टेंट मैनेजर निकला। पुलिस ने असिस्टेंट बैंक मैनेजर सहित अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह लोग एआई और चैट जीपीटी से अभ्यर्थी के फोटो को सॉल्वर की फोटो से मिक्स कर नया फोटो बना लेते थे। नए फोटो से फर्जी आईडी और आधार कार्ड बनाते थे। इसके बाद डील कर पेपर देते थे। लेकिन, आईबीपीएस के एक ई-मेल ने सॉल्वर गैंग का पूरा खेल बिगाड़ दिया। ई-मेल की मदद से लखनऊ पुलिस ने गैंग के एक सॉल्वर को पकड़ लिया। इसके बाद बैंक मैनेजर सरगना समेत गैंग के 9 सदस्यों को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया।
डीसीपी साउथ निपुण अग्रवाल ने बताया कि आईबीपीएस की 5 अक्टूबर को परीक्षा थी। एजेंसी की ओर से बिजनौर स्थित बीआर एक्जाम सेंटर पर ई-मेल आया। इसमें बताया गया कि गौरव आदित्य की जगह पर अभिषेक कुमार नाम का व्यक्ति पेपर दे रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की, तो यह बात सही पाई गई। इसके बाद अभिषेक को हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर पूरे गैंग का खुलासा हुआ। इसमें 9 अन्य लोगों को पकड़ा गया। डीसीपी निपुण अग्रवाल ने बताया कि आरोपियों की पहचान जहानाबाद बिहार के रहन वाले आनंद कुमार, पटना निवासी गौरव आदित्य, चंपावत उत्तराखंड निवासी हर्ष जोशी, गया बिहार निवासी भागीरथ शर्मा, लखीसराय बिहार निवासी सुधांशु कुमार, जहानाबाद निवासी धनंजय कुमार सौरभ, राजीव नारायण पांडे, मुकेश कुमार और आशीष रंजन के रूप में हुई। गैंग का सरगना आनंद कुमार यूपी ग्रामीण बैंक में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर कार्यरत है। इस समय उसकी पोस्टिंग खबपुरा (संभल) में है।
ये खबर भी पढ़े : वामा सारथी द्वारा यूपी पुलिस परिवार के मेधावी बच्चों का सम्मान एवं "वामा इको चैंप्स" पहल का शुभारम्भउन्होंने बताया कि गैंग का सरगना आनंद कुमार अपने साथी मुकेश, आशीष रंजन, धनंजय और भगीरथ के साथ गैंग चलाता था। एक अभ्यर्थी को पास कराने के लिए 5 लाख 20 हजार रुपए में सौदा होता था। इनमें 2 लाख आनंद के होते थे। पहली परीक्षा में बैठने वाले को 20 हजार देते थे। उसको पास करने के बाद मेन एग्जाम में बैठने वाले को एक लाख रुपए मिलते थे। बाकी बचे रुपए अन्य लोगों में बंट जाते थे।
डीसीपी ने बताया कि आरोपी फेस मिक्सिंग ऐप मिक्स ग्राइंडर, जैमिनी एआई, चैट जीपीटी, फोटोर जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से दो चेहरों को एक में मिला देते थे। यह अमूमन एक जैसा दिखने लगता था। इससे परीक्षा में बैठने वाले व्यक्ति पर संदेह नहीं होता था। वहीं जिसका एग्जाम होता था, उसका फर्जी आधार कार्ड बनाकर उसकी जगह एग्जाम देने वाले प्रॉक्सी को भेजते थे। जितने भी दूसरे की जगह पर पेपर देने आते थे, उन्हें लखनऊ के अलग-अलग सेंटर पर एग्जाम देना था। डीसीपी साउथ निपुण अग्रवाल ने बताया कि आरोपी फेस मिक्सिंग ऐप मिक्स ग्राइंडर, जैमिनी एआई, चैट जीपीटी, फोटोर जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से फेक फोटो बनाते थे।
उन्होंने बताया कि आरोपी फेस मिक्सिंग ऐप मिक्स ग्राइंडर, जैमिनी एआई, चैट जीपीटी, फोटोर जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से फेक फोटो बनाते थे। पुलिस जांच में सामने आया है कि गौरव आदित्य की जगह पर अभिषेक कुमार पेपर देने आया था। योगेंद्र कुमार की जगह पर हर्ष जोशी, आकाशदीप की जगह पर राजीव नयन पेपर में बैठने वाला था। सुधांशु किसकी जगह पर एग्जाम में बैठने वाला था, इसकी जांच की जा रही है।
आरोपी सुधांशु यूको बैंक में स्केल-1 का ऑफिसर है। इसकी वजह से उसे पूरे पेपर पैटर्न की अच्छे से जानकारी थी। वहीं, 2 आरोपी बैंकिंग और अन्य एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं। कई बार एग्जाम दे चुके हैं। इसलिए उन्हें भी पूरे पैटर्न की जानकारी थी। दो असली अभ्यर्थी योगेंद्र कुमार और आकाशदीप फरार हैं। इफको में क्लर्क मुकेश कुमार भी किसी अभ्यर्थी का पेपर देने के लिए आया था।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
