22 जुलाई से शुरू होगा एफएमडी टीकाकरण अभियान, गांव-गांव पहुंचेंगी पशु विभाग की टीमें
पशुपालकों से सभी पशुओं का टीकाकरण कराने की अपील
- 22 जुलाई से 8 सितंबर तक चलेगा विशेष टीकाकरण अभियान।
- गांव-गांव और घर-घर जाकर पशुओं को लगाए जाएंगे टीके।
- एफएमडी रोग से पशुओं के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन पर पड़ता है असर।
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के पशुपालकों के लिए राहत भरी खबर है। उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग 22 जुलाई से 8 सितम्बर तक जनपद में खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग की रोकथाम के लिए विशेष निःशुल्क टीकाकरण अभियान चलाएगा।
अभियान के तहत विभाग की टीमें गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर गोवंश एवं महिषवंशीय पशुओं का टीकाकरण करेंगी। यह जानकारी सोमवार को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. शिवनाथ यादव ने दी।
उन्होंने बताया कि एफएमडी एक अत्यंत संक्रामक रोग है, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ दुग्ध उत्पादन भी प्रभावित होता है। समय पर टीकाकरण कराने से इस बीमारी से प्रभावी बचाव संभव है और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान से भी सुरक्षा मिलती है।
उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान प्रत्येक पशु के कान में ईयर टैग लगाया जाएगा तथा उसका पंजीकरण भारत पशुधन ऐप पर किया जाएगा। इससे पशुओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा, जिससे भविष्य में विभिन्न सरकारी योजनाओं और पशुपालन सेवाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने जनपद के सभी पशुपालकों से अपील की है कि वे 22 जुलाई से शुरू होने वाले इस विशेष अभियान का पूरा लाभ उठाएं और अपने सभी गाय, बैल एवं भैंसों का निःशुल्क टीकाकरण अवश्य कराएं।
ये खबर भी पढ़े : विश्व जनसंख्या दिवस पर जागरूकता अभियान शुरू, 'छोटा परिवार ही सुखी परिवार' का दिया संदेशजिन पशुओं का अभी तक ईयर टैग नहीं लगा है, उनका टैगिंग एवं पंजीकरण भी कराएं, ताकि वे विभाग की डिजिटल सेवाओं और योजनाओं से जुड़ सकें।
उन्होंने विश्वास जताया कि पशुपालकों के सहयोग से यह अभियान सफल होगा और जनपद में पशुधन को खुरपका-मुंहपका जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण सफलता मिलेगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
माही खान एक उभरती हुई कंटेंट राइटर हैं और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए समाचार अपडेट का कार्य कर रही हैं। वह खबरों की प्रस्तुति पर विशेष ध्यान देती हैं और मीडिया क्षेत्र में सीखते हुए अपने लेखन कौशल को लगातार विकसित कर रही हैं।
