मध्य प्रदेश: मानसून की रफ्तार धीमी, 22 जिलों में हल्की बारिश के आसार, नया सिस्टम होगा सक्रिय
13 से 19 जुलाई के बीच बंगाल की खाड़ी में नया सिस्टम बनने की संभावना
- प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी बारिश दर्ज हुई।
- सामान्य बारिश 239.8 मिमी के मुकाबले सिर्फ 1 प्रतिशत अधिक वर्षा।
- मानसून को सक्रिय करने वाली मौसम प्रणालियां कमजोर हुईं।
भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून फिलहाल कमजोर पड़ गया है। प्रदेश के करीब 60 प्रतिशत हिस्से से मानसूनी बादल छंट गए हैं, जिसके चलते अगले पांच दिनों तक कहीं भी भारी या अति भारी बारिश की संभावना नहीं है। 16 जुलाई से एक नया मौसम सक्रिय हो सकता है, जिससे प्रदेश में फिर से तेज बारिश का दौर शुरू होने की उम्मीद है।
फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की बारिश और बूंदाबांदी का सिलसिला जारी रहेगा। सोमवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार और अलीराजपुर जिलों में बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई गई है।
वहीं नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, आगर-मालवा, इंदौर, उज्जैन, राजगढ़, शाजापुर, देवास, विदिशा, भोपाल, सीहोर, हरदा, नर्मदापुरम, रायसेन, नरसिंहपुर, जबलपुर, कटनी, दमोह, पन्ना, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया और ग्वालियर में मौसम साफ रहने और धूप निकलने के आसार हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून की सक्रियता में फिलहाल कमी आई है। इसी वजह से पिछले चार से पांच दिनों के दौरान प्रदेश में कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं की गई।
अगले कुछ दिनों तक केवल हल्की बारिश या रिमझिम फुहारें पड़ने की संभावना है। 16 जुलाई के बाद मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
मानसून कमजोर पड़ने की वजह
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून को सक्रिय रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां फिलहाल कमजोर हो गई हैं या उनका प्रभाव मध्य प्रदेश से दूर चला गया है। इसी कारण अधिकांश इलाकों में केवल बादल छाए रहने और हल्की बूंदाबांदी जैसी स्थिति बनी हुई है।
ये खबर भी पढ़े : मप्र के दतिया से नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद समर्थकों ने ग्वालियर-झांसी हाईवे किया जाममौसम विभाग का अनुमान है कि 13 से 19 जुलाई के बीच उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण (साइक्लोनिक सर्कुलेशन) बनने की संभावना है।
यदि यह प्रणाली निम्न दाब क्षेत्र में परिवर्तित होती है तो मध्य प्रदेश में एक बार फिर अच्छी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। इसके अलावा, प्रशांत महासागर में तीन नए मौसम तंत्र विकसित हो रहे हैं। इनमें से यदि कोई एक भी बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है, तो मानसून दोबारा सक्रिय होने की संभावना बढ़ जाएगी।
बारिश का आंकड़ा सामान्य से सिर्फ 1 प्रतिशत अधिक
पिछले पांच दिनों से भारी बारिश नहीं होने का असर प्रदेश के वर्षा आंकड़ों पर भी पड़ा है। पहले सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत अधिक दर्ज हो रही बारिश अब घटकर सिर्फ 1 प्रतिशत अधिक रह गई है।
मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) वर्षा रिकॉर्ड की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 239.8 मिमी (9.4 इंच) मानी जाती है। यानी अब तक सामान्य से केवल 1 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, जो पूरे मानसून कोटे का लगभग 25 प्रतिशत है।
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माही खान एक उभरती हुई कंटेंट राइटर हैं और वर्तमान में ‘तरुणमित्र’ से जुड़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए समाचार अपडेट का कार्य कर रही हैं। वह खबरों की प्रस्तुति पर विशेष ध्यान देती हैं और मीडिया क्षेत्र में सीखते हुए अपने लेखन कौशल को लगातार विकसित कर रही हैं।
