वर्टिकल नहीं, व्यापक कैडर रिस्ट्रक्चरिंग ही ऊर्जा निगमों की जरूरत: संघर्ष समिति
बढ़ती बिजली मांग के बीच पर्याप्त मानव संसाधन की दरकार: समिति
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने कहा है कि उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन को विफल हो चुकी वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग पर समय और संसाधन खर्च करने के बजाय प्रदेश के सभी ऊर्जा निगमों में व्यापक कैडर रिस्ट्रक्चरिंग कर मानव संसाधनों को सुदृढ़ करने पर तत्काल ध्यान देना चाहिए। संघर्ष समिति ने स्पष्ट कहा कि पर्याप्त मानव संसाधन के बिना बढ़ती हुई बिजली मांग और करोड़ों उपभोक्ताओं को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करना संभव नहीं है।
संघर्ष समिति ने कहा कि जिन शहरों में लगभग एक वर्ष पूर्व वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू की गई थी, उसका अनुभव पूरी तरह निराशाजनक रहा है। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि यह व्यवस्था न तो उपभोक्ताओं के हित में है और न ही कर्मचारियों के हित में। इससे कार्य प्रणाली जटिल हुई है, समन्वय प्रभावित हुआ है तथा उपभोक्ताओं और कर्मचारियों—दोनों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए इस असफल व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश में बिजली की मांग लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है तथा उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 73 लाख से अधिक हो चुकी है। इसके बावजूद ऊर्जा निगमों में आवश्यक संख्या में नए डिवीजन, सर्किल तथा अन्य प्रशासनिक इकाइयों का गठन नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग नहीं, बल्कि कैडर रिस्ट्रक्चरिंग ही समय की वास्तविक आवश्यकता है।
संघर्ष समिति ने स्मरण कराया कि वर्ष 2016 में विद्युत वितरण खंडों के गठन के लिए 50 हजार उपभोक्ताओं पर एक वितरण खंड बनाए जाने का मापदंड निर्धारित किया गया था। विडंबना यह है कि दस वर्ष बीत जाने के बाद भी उन मापदंडों का पूर्ण पालन नहीं किया गया। यदि उसी मानक के अनुसार पुनर्गठन किया जाता, तो प्रदेश में बड़ी संख्या में नए वितरण खंड स्थापित हो चुके होते और उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल रही होतीं।
संघर्ष समिति ने कहा कि पिछले दस वर्षों में परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। इस अवधि में बिजली की मांग लगभग दोगुनी हो गई है तथा उपभोक्ताओं की संख्या में लगभग दो करोड़ की वृद्धि हुई है। ऐसे में वर्ष 2016 के मापदंड भी अब अपर्याप्त हो चुके हैं। आवश्यकता इस बात की है कि वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप नए मानक निर्धारित किए जाएं तथा उपभोक्ता संख्या, विद्युत भार और भौगोलिक क्षेत्रफल को आधार बनाकर नए डिवीजन, सर्किल एवं अन्य इकाइयों का गठन किया जाए।
संघर्ष समिति ने कहा कि पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन अपनी जिद छोड़ते हुए विफल वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग व्यवस्था को तत्काल वापस ले तथा सभी कर्मचारी एवं अभियंता संवर्गों से व्यापक संवाद स्थापित कर सभी ऊर्जा निगमों में कैडर रिस्ट्रक्चरिंग लागू करे। समिति ने यह भी मांग की कि केवल वितरण निगम ही नहीं, बल्कि ट्रांसमिशन निगम और उत्पादन निगम में भी बढ़ते कार्यभार के अनुरूप व्यापक कैडर रिस्ट्रक्चरिंग की जाए, जिससे बिजली व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं उपभोक्ता हितैषी बनाया जा सके।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
