नीट पेपर लीक पर राहुल गांधी का बड़ा बयान, धर्मेंद्र प्रधान हटें तभी होगी चर्चा
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार के प्रस्ताव को ठुकराया, मकर द्वार पर आमने-सामने सत्ता, विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
- राहुल गांधी का आरोप-सदन में फिर बंद कर दिया गया मेरा माइक
नई दिल्ली। नीट पेपर लीक और छात्र आंदोलन को लेकर संसद का गतिरोध शुक्रवार को भी जारी रहा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने स्पष्ट कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से नहीं हटाया जाता, तब तक विपक्ष इस मुद्दे पर किसी भी चर्चा में हिस्सा नहीं लेगा। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि सदन में अपनी बात रखने के दौरान उनका माइक फिर बंद कर दिया गया, जिससे उन्हें जवाब देने का अवसर नहीं मिला।
संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार यदि किसी सदस्य का नाम लिया जाता है तो उसे अपनी बात रखने का अधिकार होता है। उनका आरोप था कि केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान का जवाब देने के लिए जैसे ही उन्होंने बोलना चाहा, उनका माइक बंद कर दिया गया। राहुल ने कहा कि विपक्ष केवल चर्चा नहीं, बल्कि जवाबदेही चाहता है।
राहुल गांधी ने छात्रों की ओर से तीन प्रमुख मांगों का उल्लेख किया। पहली, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाया जाए। दूसरी, छात्र आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। तीसरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। उन्होंने कहा कि इन मांगों पर सरकार कोई ठोस जवाब नहीं दे रही है।
संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार को छात्र आंदोलन और पेपर लीक विवाद को लेकर सियासी टकराव और तेज हो गया। संसद भवन के मकर द्वार पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। एक ओर इंडिया गठबंधन के सांसदों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई, तो दूसरी ओर एनडीए सांसद सरकार के समर्थन में उतर आए। दोनों पक्षों की नारेबाजी से संसद परिसर का माहौल देर तक गरमाया रहा।
इंडिया गठबंधन के सांसद हाथों में तख्तियां लेकर मकर द्वार पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार जवाबदेही से बच रही है। विपक्षी नेताओं ने कहा कि देशभर में लाखों छात्र प्रभावित हुए हैं और उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने शिक्षा मंत्री की नैतिक जिम्मेदारी तय करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। विपक्ष का कहना था कि संसद देश की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक संस्था है और छात्रों से जुड़े इतने गंभीर मुद्दे पर सरकार को सदन में विस्तृत चर्चा करानी चाहिए।
विपक्ष के प्रदर्शन के जवाब में एनडीए सांसद भी मकर द्वार पर पहुंच गए। उन्होंने सरकार के समर्थन में नारे लगाए और विपक्ष पर छात्र आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। सत्ता पक्ष का कहना था कि सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही है और पेपर लीक जैसे मामलों से निपटने के लिए कई कदम उठाए जा चुके हैं। एनडीए सांसदों ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप भी लगाया।
दोनों पक्षों के आमने-सामने आने से कुछ समय के लिए संसद परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई। हालांकि सुरक्षा कर्मियों ने दोनों समूहों के बीच पर्याप्त दूरी बनाए रखी और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। प्रदर्शन के दौरान दोनों गठबंधनों ने एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे संसद परिसर राजनीतिक अखाड़े में तब्दील होता नजर आया।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
