अमेरिका की फोर्स्ड लेबर पर सख्ती, भारत को अमेरिकी टैरिफ में राहत
चीन समेत कई देशों से बेहतर श्रेणी, सिर्फ दस प्रतिशत शुल्क लगाया गया
- अमेरिका ने 60 अर्थव्यवस्थाओं की समीक्षा के बाद नई टैरिफ व्यवस्था लागू की
वॉशिंगटन। अमेरिका की नई व्यापारिक कार्रवाई में भारत को बड़ी राहत मिली है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने फोर्स्ड लेबर (जबरन श्रम) से बने उत्पादों के खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई के तहत भारत पर सिर्फ 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला किया है। यह दर उन कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से कम है, जिन पर 12.5 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया गया है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान भारत ने फोर्स्ड लेबर से बने उत्पादों के आयात पर रोक लगाने की व्यवस्था लागू की, इसलिए उसे अपेक्षाकृत अनुकूल श्रेणी में रखा गया।
नई व्यवस्था के तहत अमेरिका ने 60 व्यापारिक साझेदार देशों की नीतियों की समीक्षा की। जांच में पाया गया कि कई देशों ने फोर्स्ड लेबर से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक नहीं लगाई। इसके बाद 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत कार्रवाई करते हुए 24 जुलाई से नई टैरिफ व्यवस्था लागू कर दी गई।
भारत उन 17 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, जिन पर सबसे कम 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। इस समूह में बांग्लादेश, कनाडा, इंडोनेशिया, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका और ब्रिटेन जैसे देश भी शामिल हैं। दूसरी ओर चीन, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा।
यूएसटीआर के अनुसार जून में प्रस्तावित कार्रवाई सामने आने के बाद भारत ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू किया। इसी सकारात्मक कदम को देखते हुए भारत को कम शुल्क वाली श्रेणी में रखा गया। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि दशकों की कोशिशों के बावजूद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से फोर्स्ड लेबर पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब अमेरिका चाहता है कि उसके सभी व्यापारिक साझेदार भी ऐसे उत्पादों के खिलाफ सख्त नीति अपनाएं। यह पूरी कार्रवाई 12 मार्च को शुरू हुई जांच का परिणाम है।
इस दौरान 60 अर्थव्यवस्थाओं की नीतियों की समीक्षा की गई, 45 से अधिक सरकारों से परामर्श हुआ, 2,100 से ज्यादा सार्वजनिक टिप्पणियां मिलीं और 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इसके आधार पर अमेरिका ने निष्कर्ष निकाला कि संबंधित देशों की नीतियां अमेरिकी व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
