अमीनाबाद मेडिसिन मार्केट में दवा की खरीद-बिक्री में गंभीर अनियमितता
अमीनाबाद थाने में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने दर्ज कराई एफआईआर
- एफएसडीए की जांच में 24 हजार ट्यूब का स्टॉक नहीं मिला
लखनऊ। शुक्रवार अमीनाबाद मेडिसिन मार्केट में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की जांच के बाद अमीनाबाद थाने में चार फर्मों और उनके चार संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। आरोप है कि इन लोगों ने नकली और काउंटरफिट थ्रोंबोफोब ऑइंटमेंट 20gm की खरीद-बिक्री कर बाजार में बेचा और भारी मुनाफा कमाया। जांच में यह भी सामने आया कि 24 हजार ट्यूब दवा का न तो भौतिक स्टॉक मिला और न ही उसके खरीद संबंधी मूल बिल उपलब्ध कराए गए।
एफएसडीए की शिकायत पर पुलिस ने राकेश कुमार, अविनाश चौधरी, ऋषभ कश्यप और सनी कश्यप के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इससे पहले गोंडा में भी नकली दवाओं की बड़ी खेप पकड़ी गई थी।
एफएसडीए के मुताबिक, दवा निर्माता कंपनी जाइडस हेल्थकेयर लिमिटेड ने 15 मई 2025 को शिकायत की थी कि बाजार में उसकी थ्रोम्बोफोब ऑइंटमेंट 20 ग्राम के बैच नंबर I403999 और I404222 की नकली दवा बेची जा रही है। शिकायत के बाद औषधि निरीक्षकों ने जांच शुरू की और कई फर्मों में निरीक्षण किया। जांच के दौरान पता चला कि अमीनाबाद स्थित मेसर्स शिव शक्ति फार्मा ने महाराजा इंटरप्राइजेज से उक्त दवा की खरीद दिखाई थी। बाद में 24 हजार ट्यूब दवा वापस करने के लिए डेबिट नोट भी जारी किया गया।
जांच में खरीद-बिक्री से जुड़े कई रिकॉर्ड और बिलों में गंभीर विसंगतियां मिलीं। एफएसडीए के अनुसार, संबंधित फर्में दवा की खरीद के मूल बिल, स्टॉक रजिस्टर और अन्य जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सकीं। इससे दवा की वास्तविक सप्लाई चेन और स्रोत की पुष्टि नहीं हो सकी। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि 24 हजार ट्यूब थ्रोम्बोफोब ऑइंटमेंट का न तो भौतिक सत्यापन कराया जा सका और न ही उसका स्टॉक उपलब्ध मिला। इसके अलावा महाराजा इंटरप्राइजेज द्वारा खरीद के मूल बिल भी प्रस्तुत नहीं किए गए।
ऐसे में एफएसडीए ने माना कि दवा की खरीद-बिक्री में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। एफएसडीए की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में सामने आया कि महाराजा इंटरप्राइजेज के संचालक राकेश कुमार, अविनाश चौधरी, शिव शक्ति फार्मा के संचालक ऋषभ कश्यप और अशोका फार्मास्यूटिकल्स के संचालक सनी कश्यप ने मिलकर नकली/काउंटरफेत दवा की खरीद-बिक्री का संगठित नेटवर्क तैयार किया। आरोप है कि फर्जी बिल तैयार कर दवाओं को बाजार में बेचकर आर्थिक लाभ कमाया गया।
एफएसडीए ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि संबंधित दवा की एक्सपायरी जुलाई 2027 तक है। यदि ऐसी नकली दवा मरीजों तक पहुंचती है तो यह जन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। यही वजह है कि विभाग ने मामले को आपराधिक श्रेणी का मानते हुए एफआईआर दर्ज कराने की संस्तुति की।
एफएसडीए की शिकायत पर अमीनाबाद थाने में चारों आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 276, 277, 278, 318, 319, 336, 338 और 111 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। मामले की विवेचना एसआई अंगद कुमार यादव को सौंपी गई है। पुलिस अब दवा की पूरी सप्लाई चेन, बैंक लेन-देन, बिलिंग रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की जांच करेगी। एफएसडीए का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य फर्मों या व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
