साइबर ठगों का खुलासा: ‘क्रिप्टो करेंसी’ के जरिए चीनी ठगों तक पहुंचाई जा रही थी रकम
साइबर ठगों को 'म्यूल अकाउंट' देने वाले नौ आरोपी गिरफ्तार
- मड़ियांव और क्राइम ब्रांच की टीम ने किया खुलासा
लखनऊ। रविवार क्राइम ब्रांच और मड़ियांव पुलिस ने साइबर ठगों को म्यूल अकाउंट देने वाले गिरोह के 9 लोगों को रविवार सुबह गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से 53,100 रुपए नकद, 50 एटीएम/क्रेडिट कार्ड, 2 पासबुक, 3 चेकबुक, एक टैबलेट, एक आईपैड, एक कार और एक बाइक बरामद की है। आरोपी यूएसडीटी के जरिए रुपए को चीनी ठगों तक पहुंचाते थे। डार्क नेट की मदद संपर्क में रहते थे।
डीसीपी नॉर्थ गोपाल कृष्ण चौधरी ने बताया कि क्राइम ब्रांच टीम को JMIS समन्वय पोर्टल से संदिग्ध म्यूल अकाउंट की जानकारी मिली थी। सत्यापन के दौरान केशव नगर मोड़ के पास मोहम्मद शाहरूख को पकड़ा गया। पूछताछ में उसने अपना बैंक खाता साइबर ठगी के लिए उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की और आईआईएम रोड पर मौजूद अपने साथियों की जानकारी दी। इसके बाद क्राइम ब्रांच, डीसीपी उत्तरी और मड़ियांव पुलिस की संयुक्त टीम ने आईआईएम रोड सर्विस लेन पर दबिश देकर 9 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों की पहचान जानकीपुरम निवासी मोहम्मद शाहरूख (20), महफूज खान (19), भंईन देवी मंदिर गुडंबा निवासी सैय्यद अब्दुल्ला (22), मोहिबुल्लापुर मड़ियांव निवासी मोहम्मद बसर (21), आईआईएम रोड मड़ियांव निवासी मोहम्मद रूबान (21),लालबाग हजरतगंज निवासी शाबिर (27), सिकंदर (21), नजरबाग हुसैनगंज निवासी फरहान (26), तुफैल (24) के रूप में हुई। पकड़े गए आरोपियों में सैय्यद अबदुल्ला एलएलबी की पढ़ाई कर रहा है, शाबिर नीट की तैयारी वहीं सिकंदर, फरहान और तुफैल छात्र हैं। इसके अलावा शाहरूख फर्नीचर का काम, महफूज और मोहम्मद बसर डिलीवरी ब्वाय और रूबान पेंटर है।
जांच में सामने आया कि आरोपी आर्थिक रूप से कमजोर और भोले-भाले लोगों को पैसों का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते थे। बाद में उनसे एटीएम कार्ड, पासबुक, चेकबुक, मोबाइल नंबर, इंटरनेट बैंकिंग आईडी, पासवर्ड और ओटीपी अपने कब्जे में ले लेते थे। इन खातों का इस्तेमाल म्यूल अकाउंट के रूप में किया जाता था।
साइबर ठगी से आने वाली रकम इन्हीं खातों में जमा होती थी, जिसे आरोपी एटीएम से निकाल लेते थे या आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देते थे। पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों से खुलासा हुआ कि ठगी की रकम को बाद में यूएसडीटी (क्रिप्टोकरेंसी) में बदलकर विदेशी साइबर अपराधियों के डिजिटल वॉलेट में भेजा जाता था। इसके बदले गिरोह के सदस्यों को हर ट्रांजैक्शन पर कमीशन मिलता था।
आरोपी टेलीग्राम समेत अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी साइबर अपराधियों के संपर्क में रहते थे और बैंक खातों व ट्रांजैक्शन की जानकारी साझा करते थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे आजम और अब्दुल नामक व्यक्तियों के जरिए इस नेटवर्क से जुड़े थे। इनके निर्देश पर अलग-अलग जिलों में बैंक खाते खुलवाए जाते थे और ठगी की रकम निकालने या उसे यूएसडीटी में बदलकर विदेश व विशेषकर चीनी साइबर अपराधियों तक पहुंचाता था। नेटवर्क में शामिल हर सदस्य को उसकी भूमिका के अनुसार कमीशन मिलता था।
क्या है म्यूल अकाउंट ?
म्यूल अकाउंट एक ऐसा बैंक खाता होता है जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी या जालसाज अवैध तरीके से कमाए गए पैसे (जैसे साइबर ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग) को छुपाने और इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। इसमें खाता किसी और का होता है, लेकिन उसका इस्तेमाल कोई दूसरा व्यक्ति कर रहा होता है।
जालसाज अक्सर पार्ट-टाइम जॉब, भारी कमीशन या लॉटरी का लालच देकर भोले-भाले लोगों के बैंक खाते का एक्सेस ले लेते हैं। लोगों को पता ही नहीं चलता कि उनके अकाउंट का इस्तेमाल गैरकानूनी कामों में हो रहा है। कुछ लोग पैसों के लालच में जानबूझकर अपने नाम पर फर्जी या असली खाते खुलवाकर साइबर अपराधियों को बेच देते हैं।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
