वाराणसी से छिपाकर 20 लड़कियां को लखनऊ पहुंचाने वाले गिरोह का भंडाफोड़
काशी में मल्टी लेवल मार्केटिंग नेटवर्क कंपनी में छापे से घबराई
- 30-30 हजार ट्रेनिंग के लिए जमा कराए
लखनऊ। नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से 30 से 35 हजार रुपए वसूलने और उन्हें मल्टी लेवल मार्केटिंग के जरिए नए लोगों को जोड़ने के लिए मजबूर करने वाले गिरोह का वाराणसी पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। उसके बाद गिरोह ने 20 लड़कियों को छिपाकर शनिवार रात लखनऊ पहुंचा दिया। इस दौरान लखनऊ पुलिस को सूचना मिल गई। सूचना पर पुलिस ने लड़कियों को छुड़ाकर उनके घरवालों को रविवार को सौंप दिया।
वाराणसी की साइबर क्राइम पुलिस और रोहनिया थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया। मौके पर करीब 200 युवक-युवतियां ट्रेनिंग लेते मिले, जिनमें अधिकांश उत्तर प्रदेश के साथ बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश रहने वाले हैं। पुलिस के मुताबिक, मुखबिर से सूचना मिली थी कि रोहनिया के अखरी चौकी क्षेत्र स्थित औढ़े बछांव गांव में किराए की बिल्डिंग में महादेव इंटरप्राइजेज के नाम से नौकरी दिलाने के बहाने युवाओं को बुलाकर नेटवर्क मार्केटिंग कराई जा रही है।
ये खबर भी पढ़े : रामतीरथ हत्याकांड का खुलासा: पत्नी, भाई और चचेरे भाई ने मिलकर की थी हत्या, तीन गिरफ्तारसूचना पर साइबर क्राइम और स्थानीय पुलिस ने छापा मारा। छापे के दौरान पहली मंजिल पर करीब 200 लोग ट्रेनिंग ले रहे थे, जबकि 19 लोग पूरे कार्यक्रम का संचालन कर रहे थे। पुलिस को देखकर संचालक भागने लगे, लेकिन घेराबंदी कर सभी को पकड़ लिया गया। पूछताछ में चार युवकों ने पुलिस को बताया कि उनसे ऑफिस, कृषि कार्य और टाटा कंपनी समेत विभिन्न कंपनियों में 25 हजार रुपए मासिक वेतन वाली नौकरी दिलाने का वादा किया गया था। इसके लिए पहले 30 से 32 हजार रुपए जमा कराए गए।
बाद में नौकरी देने के बजाय रोज ट्रेनिंग कराई जाने लगी और कहा गया कि जब तक अपने नीचे कम से कम तीन नए लोगों को नहीं जोड़ोगे, तब तक न वेतन मिलेगा और न जमा पैसा वापस होगा।मुख्य आरोपी दीपक कुमार शाह ने पूछताछ में बताया कि उसने महादेव इंटरप्राइजेज के माध्यम से एक डायरेक्ट मार्केटिंग कंपनी की फ्रेंचाइजी ली थी। कंपनी के प्रोडक्ट बेचने की आड़ में लोगों को नौकरी का झांसा देकर बुलाया जाता था।
उनसे 30-35 हजार रुपए 'जॉइनिंग फीस' के नाम पर लिए जाते थे और बदले में मामूली कीमत की किट देकर उन्हें नेटवर्क बढ़ाने की ट्रेनिंग दी जाती थी। आरोपी ने स्वीकार किया कि युवाओं का मनोवैज्ञानिक तरीके से ब्रेनवॉश कर उन्हें अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता था। इसी तरीके से पिरामिड चेन बनाकर लगातार नए लोगों से पैसा कमाया जाता था। पुलिस के अनुसार, ट्रेनिंग सेंटर में मौजूद अधिकांश युवक बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों से बुलाए गए थे। सभी को अच्छी नौकरी और अच्छी सैलरी का लालच देकर वाराणसी लाया गया था।
वाराणसी में ऑफिस में छापा पड़ने के बाद 20 लड़कियों को चुपचाप निकालकर शनिवार देर रात लखनऊ पहुंचा दिया गया। यहां उनको गुडंबा थाना क्षेत्र के बेहटा इलाके में एक हॉस्टल में लाकर रखा गया। सुबह के समय एक लड़की ने अपने परिजनों को सुरक्षित महसूस करते हुए मैसेज कर दिया। उनके लखनऊ में रहने वाले लोकल गार्जियन मौके पर पुलिस लेकर पहुंच गए। इसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।
मामले में पुलिस का कहना है बनारस से जुड़ा होने का मामला है जिसके चलते लड़कियों को उनके परिजनों को सुपुर्द कर दिया जाएगा। इस नेटवर्क से जुड़ी लगभग लड़कियों का बेन वॉच किया जा चुका है। बातचीत के दौरान वह बस यही कह रही थी हम नौकरी के लिए आए हैं। ट्रेनिंग चल रही है। हम कोई गलत काम नहीं कर रहे हैं। घर वापस जाने की बात पर उनका जवाब था- घर जाकर क्या करेंगे।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
