साइबर ठग गिरोह का साइबर क्राइम पुलिस ने किया पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार
पार्सल डिलीवरी के नाम पर कॉल फॉरवर्डिंग कर व्हाट्सऐप करते थे हैक
प्रतापगढ़। पीड़ित निवासी 39 पल्टन बाजार, थाना कोतवाली नगर, जनपद प्रतापगढ़ द्वारा साइबर क्राइम पुलिस थाना प्रतापगढ़ पर लिखित तहरीर दी गई कि अज्ञात जालसाजों द्वारा पार्सल डिलीवरी के नाम पर उन्हें झांसे में लेकर एक विशेष कोड डायल करवाया गया, जिसके फलस्वरूप उनके मोबाइल नंबरों पर कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय हो गई। इसके बाद साइबर अपराधियों द्वारा उनके दोनों मोबाइल नंबरों के व्हाट्सऐप अकाउंट पर अवैध रूप से नियंत्रण प्राप्त कर उनके रिश्तेदारों एवं परिचितों से धोखाधड़ी की गई।
अभियोग के शीघ्र अनावरण हेतु पुलिस अधीक्षक प्रतापगढ़ दीपक भूकर के निर्देशन में अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी आलोक कुमार के पर्वेक्षण व क्षेत्राधिकारी नगर आशुतोष मिश्रा नेतृत्व में साइबर क्राइम पुलिस टीम द्वारा तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण करते हुए अपराध में प्रयुक्त बैंक खातों, मोबाइल नंबरों, UPI ID एवं अन्य डिजिटल साक्ष्यों को ट्रेस किया गया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर प्रकाश में आए अभियुक्तगण 01. अमित कुमार पुत्र स्व0 केदार राम, उम्र करीब 20 वर्ष, 2. लालटुश कुमार पुत्र चन्द्रिका यादव उर्फ चाँद 3. सोनू कुमार पुत्र रामचन्द्र उर्फ मुन्नाराम निवासीगण ग्राम नसरतपुर, थाना बरबीघा, जनपद शेखपुरा, बिहार को दिनांक 14.08.2026 को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ एवं तकनीकी जांच से प्रकाश में आया कि उक्त गिरोह द्वारा इंटरनेट एवं गूगल सर्च के माध्यम से संभावित पीड़ितों के नाम, पते एवं मोबाइल नंबरों से संबंधित जानकारी एकत्र की जाती थी। इसके बाद गिरोह के सदस्य फर्जी/अन्य सिमकार्ड से पीड़ितों को कॉल कर स्वयं को कूरियर अथवा पार्सल सर्विस का प्रतिनिधि बताते थे तथा पार्सल डिलीवरी अथवा पता सत्यापन के नाम पर पीड़ित को कॉल फॉरवर्डिंग एक्टिवेट करने के लिए कहते थे।
कोड डायल करते ही पीड़ित के मोबाइल नंबर की इनकमिंग कॉल अपराधियों के मोबाइल नंबर पर फॉरवर्ड हो जाती थी। इसके बाद अपराधी कॉल आधारित सत्यापन (Call-Based Verification) का दुरुपयोग कर पीड़ित के व्हाट्सऐप अकाउंट पर अनधिकृत रूप से नियंत्रण प्राप्त कर लेते थे । व्हाट्सऐप अकाउंट पर नियंत्रण प्राप्त करने के बाद अपराधी पीड़ित के रिश्तेदारों एवं परिचितों को बीमारी, दुर्घटना अथवा अस्पताल में भर्ती होने जैसी परिस्थितियों का हवाला देकर भावनात्मक रूप से भ्रमित करते थे तथा फर्जी बैंक खातों एवं QR कोड के माध्यम से धनराशि प्राप्त करते थे। ठगी की धनराशि प्राप्त होने के बाद पुलिस द्वारा बैंक खातों को ब्लॉक किए जाने से पूर्व ही एटीएम एवं अन्य माध्यमों से धनराशि निकाल ली जाती थी।
समन्वय पोर्टल पर की गई जांच में प्रकाश में आया कि गिरफ्तार अभियुक्तों से संबंधित साइबर धोखाधड़ी की कुल 80 शिकायतें विभिन्न राज्यों में पंजीकृत हैं।
समन्वय पोर्टल पर की गई जांच में प्रकाश में आया कि गिरफ्तार अभियुक्तों द्वारा विभिन्न राज्यों में दर्ज कुल 80 साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों में लगभग ₹37,79,247/- (सैंतीस लाख उन्यासी हजार दो सौ सैंतालीस रुपये) की धनराशि की साइबर ठगी की गई।
लेखक के बारे में
ब्रजेश त्रिपाठी को पत्रकारिता क्षेत्र में 35 वर्षों का समृद्ध अनुभव है। अपने लंबे करियर के दौरान उन्होंने समाचार लेखन और संपादन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है। वर्तमान में वह ‘तरुणमित्र’ में उप्र के प्रतापगढ़ जनपद के व्यूरो प्रमुख के पद पर कार्यरत हैं।
