प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को कराने में शिक्षा बजट का तीन गुना खर्च होता : कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोले, 12 सालों में 23 प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए
कहा, छात्रों के भविष्य संग खिलवाड़ करने वाले शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान को देना चाहिये इस्तीफा
लखनऊ। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने शनिवार को पार्टी मुख्यालय पर पत्रकारों से बातचीत कहा कि वर्ष 2018, 2021, 2022, 2024, 2026 में नीट परीक्षा में गड़बड़ियां और पेपरलीक हुए। इसके पूर्व भी 2015 में एआईपीएमटी(वर्तमान में नीट) का भी पेपरलीक हो चुका है। देश में युवाओं और छात्रों के भविष्य के साथ लगातार हो रही भयावह त्रासदी के बावजूद केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं दिया। कांग्रेस पार्टी केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग करती है।
आगे कहा कि कहा कि विगत 03 मई 2026 को आयोजित नीट परीक्षा जिसमें कुल 22 लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल हुए थे उसमें बड़े पैमाने पर प्रश्न लीक हुए जिसकी खबर सोशल मीडिया के माध्यम से पूरे देश में सार्वजनिक हुए। दबाव में आयी केन्द्र सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी और दोबारा परीक्षा कराये जाने का निर्णय लेना पड़ा।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इस राष्ट्रीय स्तर की नीट परीक्षा के अलावा सीबीएससी की उत्तर पुस्तिका मूल्यांकन में गड़बड़ियों के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश में चाहे लेखपाल भर्ती परीक्षा हो, यूपीएसआई, पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा हो, आरओ-एआरओ भर्ती परीक्षा हो, एसएससी जीडी भर्ती परीक्षा हो, सहायक प्रोफेसर भर्ती परीक्षा हो, ऐसी तमाम प्रतियोगी परीक्षाएं पेपर लीक के माध्यम से भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयीं। नीट पेपर लीक से पैदा हुए मानसिक तनाव के कारण देश के विभिन्न राज्यों से अब तक 12 छात्र अपनी जान गंवा चुके हैं।
ये खबर भी पढ़े : विधायक मेहदावल द्वारा विकास प्रदर्शनी के अंतिम दिन विकास प्रदर्शनी का किया गया भव्य समापन।कांग्रेस पार्टी इसे आत्महत्या नहीं बल्कि सरकार उत्प्रेरित हत्या मानती है। कहा कि पिछले 12 वर्षों में 23 राष्ट्रीय परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं यानी लगभग हर वर्ष दो पेपर लीक हुए हैं। अब तक देश भर में लगभग 90 से अधिक पेपर लीक हो चुके हैं लेकिन दोषियों को सजा मिलने के मामले न के बराबर है। राय ने कहा कि हमारे नेता राहुल गांधी ने कोटा में छात्र संवाद कार्यक्रम में कहा कि एजुकेशन सिस्टम हिंदुस्तान के सबसे गरीब और मिडल क्लास लोगों से नीट परीक्षा के लिए हिन्दुस्तान के शिक्षा बजट के बराबर पैसा खर्च करवाता है। 22 लाख छात्रों की नीट परीक्षा की तैयारी का औसत खर्च एक लाख बत्तीस हजार करोड़ रुपए आता है जो हिन्दुस्तान के मौजूदा शिक्षा बजट एक लाख चालीस हजार करोड़ के करीब है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश की पाँच प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं-नीट, एसएससी, यूपीएससी, आरआरबी, जेईई के लिए उतना पैसा खर्च होता है जो कि भारत सरकार के शिक्षा बजट का तीन गुना है। एनटीए, जिसके द्वारा नीट सहित तमाम प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित होती है वह लगातार सवालों के घेरे में है। पद खाली हैं। 98 हजार 592 स्कूलों में लड़कियों के लिए सक्रिय शौचालय नहीं है।
आम परिवारों को महंगे निजी विद्यालयों की तरफ ढकेल दिया गया है। जिन परिवारों की सालाना आय दो लाख रुपए तक है उनको अपनी इनकम का 40 प्रतिशत बच्चों की शिक्षा पर खर्च करना पड़ रहा है यहां तक कि अपनी सम्पत्ति बेचकर और कर्ज लेकर बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
