आउटसोर्स पोर्टल की आड़ में संविदा कर्मियों की छंटनी की तैयारी चिंताजनक: समिति
2017 के आदेश के अनुरूप सभी संविदा कर्मियों को बहाल कर आउटसोर्स सेवा निगम के अंतर्गत लाए जाने की मांग
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा 18 जून, 2026 को जारी उस आदेश पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिसमें कहा गया है कि जून माह का भुगतान जुलाई में केवल आउटसोर्स पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा है कि उक्त आदेश के विभिन्न बिंदुओं का अध्ययन करने से यह आशंका उत्पन्न होती है कि पोर्टल पर दर्ज नामों एवं वास्तविक रूप से कार्यरत संविदा कर्मियों के बीच किसी भी प्रकार की विसंगति का बहाना बनाकर बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को भुगतान से वंचित किया जा सकता है अथवा उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं।
संघर्ष समिति ने कहा कि जिन संविदा कर्मियों का नाम किसी कारणवश पोर्टल पर दर्ज नहीं है अथवा जिनकी उपस्थिति ऐप के माध्यम से दर्ज नहीं हो पा रही है, उन्हें भुगतान न किए जाने और कार्य से हटाए जाने का खतरा पैदा हो गया है। यह स्थिति हजारों संविदा कर्मियों और उनके परिवारों के समक्ष गंभीर आजीविका संकट खड़ा कर सकती है।
संघर्ष समिति ने कहा कि प्रदेश में पहले ही संविदा कर्मियों की भारी कमी के कारण विद्युत व्यवस्था गंभीर दबाव में है। अनेक स्थानों पर कर्मचारियों की कमी के चलते उपभोक्ताओं का आक्रोश बढ़ रहा है तथा कर्मचारियों के साथ अभद्रता और मारपीट की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। ऐसी परिस्थिति में आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने के बजाय प्रबंधन का ध्यान संविदा कर्मियों की संख्या और कम करने पर केंद्रित दिखाई दे रहा है।
संघर्ष समिति ने याद दिलाया कि वर्ष 2017 में जारी आदेश के माध्यम से शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के विद्युत उपकेंद्रों पर संविदा कर्मियों की न्यूनतम संख्या निर्धारित की गई थी। आज तक उस आदेश में कोई संशोधन नहीं किया गया है। इसके बावजूद मार्च 2023 से बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को कार्य से हटाया गया है, जिससे विद्युत व्यवस्था और अधिक प्रभावित हुई है। अब आउटसोर्स पोर्टल के माध्यम से भुगतान की व्यवस्था को भी छंटनी के एक नए माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।
संघर्ष समिति ने कहा कि मार्च 2023 में ऊर्जा मंत्री की उपस्थिति में हुए समझौते के अनुसार हटाए गए संविदा कर्मियों की बहाली की जानी थी, किंतु आज तक उस समझौते का पालन नहीं किया गया। हजारों हटाए गए संविदा कर्मी आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और पुनर्बहाली की आशा लगाए हुए हैं। इसके विपरीत उन्हें बाहर रखने और नए-नए प्रशासनिक उपायों के माध्यम से और अधिक कर्मियों को हटाने की कोशिशें की जा रही हैं।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट रूप से कहा कि समस्या का वास्तविक समाधान संविदा कर्मियों की छंटनी नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए ऊर्जा निगमों के सभी संविदा कर्मियों को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के अंतर्गत लाना है। इससे एक ओर श्रमिकों का शोषण रुकेगा और दूसरी ओर विद्युत व्यवस्था को आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा।
संघर्ष समिति ने मांग की है कि वर्ष 2017 के आदेश के अनुरूप आवश्यक संख्या में संविदा कर्मियों को तत्काल बहाल किया जाए, मार्च 2023 से हटाए गए सभी संविदा कर्मियों की पुनर्बहाली की जाए, तथा आउटसोर्स सेवा निगम की नियमावली के अनुसार सभी संविदा कर्मियों को न्यूनतम रु 18,000 प्रतिमाह वेतन एवं अन्य निर्धारित सुविधाएं प्रदान की जाएं।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
