ग्रामीण निकायों में ओबीसी आरक्षण पर आयोग ने सुनी जनता की राय
कलेक्ट्रेट सभागार में जनसुनवाई का आयोजन
रामनाथ सिंह
- जनसुनवाई में ग्रामीण सामाजिक स्थिति और ओबीसी आरक्षण पर हुआ मंथन
बिजनौर। उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जनसुनवाई कर ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के राजनीतिक आरक्षण को लेकर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सुझाव लिए। उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था को तथ्यपरक, पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने के लिए जनसहभागिता बेहद जरूरी है।
जनसुनवाई के दौरान आयोग ने ग्रामीण क्षेत्रों की सामाजिक स्थिति, पिछड़ेपन के स्वरूप और ओबीसी के लिए राजनीतिक आरक्षण के उचित प्रतिशत को लेकर जनप्रतिनिधियों से प्रश्नोत्तर के माध्यम से जानकारी जुटाई। आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव से पहले वास्तविक सामाजिक परिस्थितियों का आकलन कर राज्य सरकार को आवश्यक संस्तुतियां भेजी जाएंगी।
प्रशासक जिला पंचायत साकेंद्र प्रताप सिंह ने आयोग को बताया कि जनपद की कुल आबादी 36,82,713 है, जिसमें 27,89,589 ग्रामीण क्षेत्र में निवास करते हैं। जिले में 5 तहसील, 11 विकास खंड, 1123 ग्राम प्रधान, 56 जिला पंचायत सदस्य, 1393 क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा 11,223 ग्राम पंचायत सदस्य ग्रामीण स्वशासन को मजबूत बनाने में भूमिका निभा रहे हैं।
आयोग के सदस्यों ने जिला पंचायत सदस्यों से ग्रामीण क्षेत्रों की प्रमुख सामाजिक समस्याओं और उनके समाधान के सुझाव भी लिए। अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि प्राप्त सुझावों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई के लिए उन्हें संज्ञान में लिया जाएगा।
जनसुनवाई में आयोग के सदस्य बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, एस.पी. सिंह, जिलाधिकारी जसजीत कौर, पुलिस अधीक्षक अभिषेक झा, मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह, जिला विकास अधिकारी रचना गुप्ता, डीपीआरओ डॉ. प्रीतम सिंह सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
