अलीगंज अग्निकांड की चार्जशीट तैयार, सुरक्षा व्यवस्था में मिलीं गंभीर खामियां
लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड हादसे के 87 दिन बाद पुलिस ने 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की
- इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई, सुरक्षा व्यवस्था जांच में खुली भवन की बड़ी पोल
- आपातकालीन सीढ़ियों की जगह बना था लिफ्ट, 20 किलोवाट की मंजूरी पर 35 किलोवाट का इस्तमाल
लखनऊ। अलीगंज में 22 जून को हुए अग्निकांड के करीब 87 दिन बाद पुलिस ने 500 से अधिक पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है। जांच में भवन की सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। पुलिस के मुताबिक, फायर एग्जिट के लिए बनाई गई आपातकालीन सीढ़ियों की जगह लिफ्ट लगा दी गई थी। इसके अलावा भवन में स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली का इस्तेमाल भी किया जा रहा था।
जांच के अनुसार, भवन में आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए मुख्य रास्ते के अलावा कोई अलग आपातकालीन निकास नहीं था। फायर एग्जिट वाली जगह पर लिफ्ट लगाए जाने के कारण ऊपरी मंजिलों पर मौजूद लोगों के पास बाहर निकलने का सुरक्षित वैकल्पिक रास्ता नहीं था। एसआईटी ने इसे हादसे में अधिक लोगों के फंसने और मौत होने की प्रमुख वजहों में शामिल किया है।
जांच में यह भी सामने आया कि भवन में धुआं बाहर निकालने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। आग लगने के बाद धुआं तेजी से फैल गया, जिससे अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने में काफी परेशानी हुई।
स्वीकृत क्षमता से अधिक बिजली का इस्तेमाल
पुलिस जांच में भवन के बिजली कनेक्शन को लेकर भी गंभीर अनियमितता सामने आई है। भवन के लिए 20 किलोवाट बिजली कनेक्शन स्वीकृत था, जबकि जांच के दौरान वास्तविक खपत 35 किलोवाट से अधिक पाई गई। पुलिस ने अतिरिक्त विद्युत लोड को आग तेजी से फैलने की संभावित वजहों में शामिल किया है। एसी के आउटर यूनिट और अन्य बिजली उपकरणों की व्यवस्था भी सुरक्षित मानकों के अनुरूप नहीं मिली।
विद्युत सुरक्षा एनओसी पर भी सवाल
जांच के दौरान भवन मालिक की ओर से प्रस्तुत विद्युत सुरक्षा एनओसी भी सवालों के घेरे में आ गई। विभागीय रिकॉर्ड में एनओसी का पत्रांक और डिस्पैच नंबर नहीं मिला। दस्तावेज के हस्ताक्षर, फॉन्ट, लिखावट और पेपर डिजाइन में भी अंतर पाया गया। इसके बाद भवन मालिक के खिलाफ कथित फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उसका इस्तेमाल करने का अलग मामला दर्ज किया गया।
चार लोगों को बनाया आरोपी
पुलिस ने भवन मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला समेत चार लोगों को आरोपी बनाया है। इनमें रामकृष्ण उपाध्याय, तुषांक कृष्ण जायसवाल और स्टूडियो संचालक सुरेश कुमार साहू शामिल हैं। वहीं, एक आरोपी सुरेंद्र अभी फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस तलाश कर रही है और उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
सरकारी विभागों की भूमिका की भी जांच
मामले की जांच भवन मालिक और संचालकों तक सीमित नहीं रही। कोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम, एलडीए, फायर विभाग और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की गई। एसआईटी की रिपोर्ट में भवन की मंजूरी और निगरानी से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। एलडीए की जांच में भी स्वीकृत नक्शे से अधिक निर्माण किए जाने की बात सामने आई थी।
पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 105, 125 और 3(5) तथा यूपी फायर सर्विस एक्ट की धारा 6 और 10 के तहत चार्जशीट दाखिल की है। मामले में फरार आरोपी सुरेंद्र की तलाश जारी है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब 03 वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट एडिटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
