निकाय चुनाव में नगर परिषदों पर भाजपा का दबदबा, नगर पंचायतों में कांग्रेस आगे

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शिमला । हिमाचल प्रदेश में रविवार देर शाम आए शहरी निकाय चुनाव के नतीजों में दिलचस्प तस्वीर सामने आई है। राज्य की 25 नगर परिषदों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का दबदबा देखने को मिला, जबकि 22 नगर पंचायतों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार आगे रहे। कुल 47 शहरी निकायों के नतीजों में भाजपा समर्थित उम्मीदवार 22 निकायों में बढ़त बनाने में सफल रहे, जबकि कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने 17 निकायों में जीत दर्ज की। चार निकायों में निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों का प्रभाव रहा, जबकि चार जगह मुकाबला बराबरी पर छूटा।

प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद नगर परिषदों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों का प्रदर्शन बेहतर रहा। खासकर बिलासपुर, सुंदरनगर, मनाली और नालागढ़ जैसे शहरी इलाकों में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने मजबूत बढ़त दर्ज की। दूसरी ओर नगर पंचायतों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने बेहतर तालमेल और स्थानीय समीकरणों के दम पर बढ़त बनाई।

25 नगर परिषदों की बात करें तो भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने 14 नगर परिषदों में बढ़त हासिल की। इनमें बिलासपुर, घुमारवीं, श्री नयनादेवी, डलहौजी, नगरोटा बगवां, मनाली, सुंदरनगर, जोगिंद्रनगर, रामपुर, परवाणू, नालागढ़, नाहन, संतोषगढ़ और मेहतपुर शामिल हैं।

कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने पांच नगर परिषदों में जीत दर्ज की। इनमें कांगड़ा, नूरपुर, देहरा, ज्वालामुखी और नेरचौक शामिल हैं।

तीन नगर परिषदों में निर्दलीयों और अन्य उम्मीदवारों ने बाजी मारी। सुजानपुर, कुल्लू और पांवटा साहिब में किसी एक दल का दबदबा नहीं दिखा और स्थानीय उम्मीदवारों ने बड़ी पार्टियों को कड़ी चुनौती दी।

इसके अलावा चंबा, सरकाघाट और ठियोग नगर परिषदों में भाजपा और कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर रही। यहां दोनों दलों के उम्मीदवार लगभग बराबरी पर रहे और स्पष्ट बढ़त किसी पक्ष को नहीं मिल सकी।

नगर पंचायतों के नतीजों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार भाजपा पर भारी पड़े। 22 नगर पंचायतों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने 12 जगह जीत दर्ज की। इनमें चुवाड़ी, शाहपुर, भुंतर, निरमंड, बंजार, रिवालसर, करसोग, चौपाल, जुब्बल, चिड़गांव, राजगढ़ और दौलतपुर चौक शामिल हैं।

भाजपा समर्थित उम्मीदवारों को आठ नगर पंचायतों में सफलता मिली। इनमें तलाई, सुन्नी, कोटखाई, अर्की, कंडाघाट, गगरेट, टाहलीवाल और अंब शामिल हैं।

नेरवा नगर पंचायत में निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा रहा, जबकि भोटा नगर पंचायत में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका। यहां मुकाबला त्रिकोणीय रहा और नतीजा त्रिशंकु स्थिति में पहुंच गया।

शिमला जिला के नतीजों ने भी अलग तस्वीर पेश की। चौपाल और जुब्बल नगर पंचायतों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार आगे रहे, जबकि कांग्रेस के गढ़ कोटखाई में भाजपा समर्थित उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की। कांग्रेस के वर्चस्व वाली रामपुर नगर परिषद भाजपा के खाते में गई, जबकि ठियोग में मुकाबला बराबरी पर रहा।

कांगड़ा जिला में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों ने अच्छा प्रदर्शन किया। कांगड़ा, नूरपुर, देहरा और ज्वालामुखी नगर परिषदों में कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों को बढ़त मिली। वहीं नगरोटा बगवां में भाजपा समर्थित उम्मीदवार आगे रहे।

इन चुनावों में कई जगह स्थानीय मुद्दे और बागी उम्मीदवार भी अहम रहे। पांवटा साहिब, कुल्लू और सुजानपुर जैसे इलाकों में निर्दलीयों ने दोनों प्रमुख दलों का समीकरण बिगाड़ा। वहीं चंबा, सरकाघाट और ठियोग जैसे इलाकों में कड़ी टक्कर ने मुकाबले को रोचक बनाए रखा।

राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार हिमाचल प्रदेश में रविवार को हुए शहरी निकाय चुनाव में कुल 69.76 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। मतदान के दौरान कई जगह महिलाओं, युवाओं और बुजुर्ग मतदाताओं में खासा उत्साह देखने को मिला। चार नगर निगमो धर्मशाला, पालमपुर, सोलन और मंडी के चुनाव नतीजे 31 मई को घोषित होंगे।

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‘तरुणमित्र’ श्रम ही आधार, सिर्फ खबरों से सरोकार। के तर्ज पर प्रकाशित होने वाला ऐसा समचाार पत्र है जो वर्ष 1978 में पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जैसे सुविधाविहीन शहर से स्व0 समूह सम्पादक कैलाशनाथ के श्रम के बदौलत प्रकाशित होकर आज पांच प्रदेश (उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तराखण्ड) तक अपनी पहुंच बना चुका है। 

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