E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने पर मिलेगी नई कार? आयोग ने कंपनी को दिए बड़े आदेश
रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग ने वाहन मालिक के पक्ष में सुनाया फैसला
- कंपनी को 45 दिन में कार बदलने या 20.50 लाख रुपये चुकाने के निर्देश
- मानसिक प्रताड़ना के लिए एक लाख और वाद व्यय के 10 हजार रुपये भी देने होंगे
रायपुर। ई 20 पेट्रोल से वाहन में कथित खराबी के मामले में रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए संबंधित कंपनी और अन्य पक्षकारों को वाहन बदलने या निर्धारित मुआवजा देने का आदेश दिया है। इसे ई20 पेट्रोल विवाद में देश के पहले अहम उपभोक्ता फैसलों में माना जा रहा है।
प्रेमराज देवता ने आयोग में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया था कि उनकी मारुति ग्रैंड विटारा में ई20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद इंजन में बार-बार खराबी आने लगी। वाहन में मिसफायरिंग, परफॉर्मेंस घटने और माइलेज कम होने जैसी समस्याएं लगातार बनी रहीं। कई बार सर्विस सेंटर पर मरम्मत कराने के बावजूद समस्या दूर नहीं हुई।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत दायर परिवाद पर सुनवाई के बाद आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया। आयोग ने माना कि उपभोक्ता के पास व्यवहारिक रूप से अन्य ईंधन का विकल्प उपलब्ध नहीं था, क्योंकि अधिकांश पेट्रोल पंपों पर ई 20 पेट्रोल ही उपलब्ध कराया जा रहा था।आयोग ने आदेश दिया कि संबंधित पक्षकार 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की पुरानी कार वापस लेकर उसी मॉडल की नई, ई 20 अनुकूल कार उपलब्ध कराएं। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो वाहन की कीमत और अन्य मदों सहित 20,50,494 रुपये का भुगतान करना होगा।
इसके अलावा आयोग ने मानसिक पीड़ा के लिए एक लाख रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 10 हजार रुपये देने का भी आदेश दिया है। यदि 45 दिन के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो पूरी राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा। यह फैसला भविष्य में ई 20 ईंधन से जुड़े उपभोक्ता विवादों और वाहन निमार्ताओं की जिम्मेदारी तय करने के लिहाज से एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
