विश्व पर्यावरण दिवस पर ग्रेट निकोबार परियोजना को लेकर राहुल ने छेड़ी नई बहस
कहा, परियोजना से पर्यावरण और जैव विविधता को खतरा
नई दिल्ली। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक बार फिर ग्रेट निकोबार द्वीप परियोजना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो जारी करते हुए आरोप लगाया कि करीब 72 हजार करोड़ रुपये की इस परियोजना से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचेगा और स्थानीय समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रस्तावित परियोजना के कारण बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई होगी, प्रवाल भित्तियों को नुकसान पहुंचेगा और स्थानीय समुदायों के विस्थापन का खतरा पैदा होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परियोजना में आईएनएस बाज जैसे मौजूदा रक्षा ढांचे के उन्नयन की अनदेखी की जा रही है। राहुल ने यह भी दावा किया कि परियोजना का वास्तविक लाभ एक बड़े कारोबारी को मिलेगा, जो यहां होटल और कैसीनो विकसित करेगा।
ये खबर भी पढ़े : साकेत के सैदुल्लाजाब में चार मंजिला इमारत ढही, कैंटीन और कोचिंग सेंटर पर गिरा मलबा, 11 लोगों को निकालाकांग्रेस नेता ने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए जो पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखे। उन्होंने कहा कि ग्रेट निकोबार जैसे द्वीप दुनिया के सबसे उत्कृष्ट और टिकाऊ पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने युवाओं से सवाल किया कि वे भविष्य में किस तरह का भारत विरासत में पाना चाहते हैं। इसके साथ ही राहुल गांधी ने एक आॅनलाइन अभियान भी शुरू किया और लोगों से याचिका पर हस्ताक्षर कर अपनी राय दर्ज कराने की अपील की।
कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी की हालिया ग्रेट निकोबार यात्रा से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो भी साझा किए गए हैं। पार्टी का कहना है कि परियोजना से द्वीप की नाजुक पारिस्थितिकी और जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है।
हालांकि परियोजना के समर्थक इसे भारत की ह्यएक्ट ईस्टह्ण नीति और सामरिक हितों के लिए महत्वपूर्ण बताते हैं। सरकार और संबंधित अधिकारियों का कहना है कि पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए व्यापक उपाय किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार अगले 20 वर्षों में केवल 1.82 प्रतिशत वन क्षेत्र प्रभावित होगा और लगभग सात लाख पेड़ों की कटाई की जाएगी। इसके बदले 24,750 हेक्टेयर क्षेत्र में क्षतिपूरक वृक्षारोपण किया जाएगा तथा 66 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को हरित क्षेत्र के रूप में संरक्षित रखा जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस परियोजना में मलक्का जलडमरूमध्य के निकट एक ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, हवाई अड्डा और आधुनिक टाउनशिप का विकास शामिल है, जिससे समुद्री सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना को लेकर पर्यावरण और विकास के बीच बहस लगातार तेज होती जा रही है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
