साइकिल परिवहन साधन नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली का माध्यम
अखिलेश यादव का विजन इंडियाः-राजेन्द्र चौधरी
लखनऊ। तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश में साइकिलिंग और साइकिल ट्रैक का महत्व बढ़ गया है। दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, ऊर्जा संकट और असंतुलित शहरीकरण जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में साइकिलिंग केवल एक परिवहन साधन नहीं रह गई है, बल्कि यह सतत विकास, स्वस्थ जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। अनेक देशों ने साइकिलिंग को अपनी परिवहन नीति का अभिन्न हिस्सा बनाया है।
अखिलेश यादव द्वारा बनाया गया साइकिल ट्रैक आज फिर चर्चाओं में है। विश्व के विकसित देशों में साइकिल को हरित परिवहन का सबसे प्रभावी साधन माना जा रहा है। नीदरलैंड, डेनमार्क और जर्मनी जैसे देशों में साइकिल ट्रैक का विस्तृत नेटवर्क तैयार किया गया है। इससे न केवल प्रदूषण में कमी आई है, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है। संयुक्त राष्ट्र और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए साइकिलिंग को बढ़ावा देने की सिफारिश करती हैं। इससे 37 प्रतिशत तक कार्बन उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। यों तो साइकिल की विकास यात्रा 1866 से शुरू हो गई थी पर आज की साइकिल की निर्माण प्रक्रिया में 1900 के बाद बहुत सुधार किए गए।
ये खबर भी पढ़े : टीजीटी परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा, दूसरे अभ्यर्थी बनकर परीक्षा दे रहा युवक गिरफ्तारभारत में विदेश से जापान-इंग्लैंड साइकिल के कलपुर्ज मंगाकर काम चलता था। भारत में साइकिल बनाने का कोई कारखाना नहीं था। 1948 में संसद में यह मामला उठा। 6 अप्रैल 1950 को संसद में व्यापार मंत्री के.सी. त्यागी ने बताया कि एक लाख साइकिलें मंगाना तय हुआ है। 1953 में आगरा में साइकिल बनाने का पहला कारखाना लगा।
पांच लाख रुपए की कीमत से मशीनें लगी। भारत में 1950 में साइकिल की बिक्री में खूब धूम मची। 1951 में विदेशी रेले साइकिल 315 रुपये, रज 300 रुपये, इंडिया 160 रूपये, हरक्यूलिस 236 रूपये, फिलिप्स 230 रुपये और नारमन 224 रुपये में मिलती थी। तब भारत के ग्रामीण और कस्बाई जीवन का साइकिल अभिन्न हिस्सा बन गई थी। किसान, मजदूर, छात्र और छोटे व्यवसायी लम्बे समय तक इसे दैनिक जीवन का साधन बनाते रहे। एक समय शादी-विवाह में और दहेज में साइकिल का अपना अलग महत्व होता था।
साइकिलिंग का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह शून्य प्रदूषण उत्पन्न करती है, कम लागत वाली है और आम नागरिकों के लिए सुलभ है। उत्तर प्रदेश भारत का सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य है। यहां के शहरों और कस्बों में बढ़ते वाहन, ट्रैफिक जाम और प्रदूषण गंभीर चुनौतियां बन चुके हैं। ऐसे में साइकिल ट्रैक और साइकिलिंग संस्कृति को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
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लेखक के बारे में
हर्षित साहू पिछले करीब दो वर्षों से ‘तरुणमित्र’ से जुड़े हुए हैं और बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। वह लखनऊ में आधारित हैं और समाचार लेखन के माध्यम से समसामयिक, सामाजिक एवं स्थानीय मुद्दों से जुड़ी खबरें लिखते हैं।
