में अपनी बेटी को इंडियन संस्कार देना चाहती हूं:अंजली फौगाट

फ़िल्म इंडस्ट्री के कई सितारों के साथ फैशन डिजाइनर के तौर पर अपना मुकाम हासिल करनेवाली भारतीय प्रेरणादाई महिला अंजली फौगाट अपनी शार्ट फ़िल्म के जरिए  कान्स फिल्म फेस्टिवल में भारत का प्रतिनिधित्व करने को लेकर काफी प्रशंसा बटौर रही हैं। आपको बता दें अंजली फौगाट विदेश में रहते हुए फैशन के जरिए भारतीय संस्कृति और कल्चर को डेवलप कर के अभी भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी है हालही में उनके साथ इंटरव्यू के दौरान हुई बातचीत के मुख्य अंश पेश :-

आपकी फ़िल्म कांस तक पहुँची कैसा अनुभव हो रहा है?

निश्चित रूप से अच्छा अनुभव हो रहा है और एक बात बताना चाहूंगी कि में सिर्फ डिज़ाइनर नही हूं बल्कि आईटी बैंकिंग में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर काम करती हूं और अपने काम के साथ-साथ फ़िल्म की स्क्रिप्ट को लिखना पूरी कास्ट के लिए कॉस्च्यूम डिजाइन करना। और फ़िल्म को इतने बड़े मुकाम पर ले जाना मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।

आज के दौर में हॉलीवुड और बॉलीवुड में फैशन डिजाइनर की क्या अहमियत हैं?

फ़ैशन डिजाइन की अहमियत बहुत ज्यादा है क्योंकि जब तक एक अच्छा डिजाइन उस किरदार के लिए काम नही करेगा, वो किरदार कैसे उर रोल में उतरेगा,क्योंकि जब स्क्रिप्ट राइटर स्टोरी लिखता है तो एक डिजाइन के तौर पर आप उस किरदार को रियलिटी में उतारते हो। किरदार की ज्वैलरी, वैसे कपड़े डिजाइन करने के बाद वो किरदार असली मायने में किरदार को फील कर पाता है।

एक महिला होने के नाते इस मुकाम पर पहुंचने के लिए कैसी चुनौतियों का सामना किया है?

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में ये जरूर कहना चाहूंगी इसका श्रेय में अपनी फैमेली को देती हूं क्योंकि मेरी फैमेली ने बहुत सपोर्ट किया है चाहें क्वालिफिकेशन की बात करे, या जॉब की बात करे, मेरी फैमेली ने मुझे बहुत सपोर्ट किया है। माना जाता है कि भारतीय नारी है तो वो किचन में खाना पकाएंगी लेकिन मेरे हसबैंड मुझे हर जगह सपोर्ट करते है फिर भी बहुत सारी चुनौतियां आई क्योंकि दूसरे देश में आसान नही है वर्क वीजा लेना। जहा तक फैशन इंडस्ट्री में कदम रखने की बात है तो इतना भी नही मालूम दूसरी कंट्री के रूल्स क्या है। ये सब को लेकर काफी चैलेंजिंग जर्नी रही हैं।

आप कैसी माँ और अपनी बेटी को कैसी परवरिश देना चाहती हैं?

में अपनी बेटी के अंदर सारे अपने इंडियन संस्कार और वेल्यु है वो इंस्टल करना चाहती हूं और में उसके लिए लगातार प्रयास करती रहती हूं,जैसी मेरी बेटी हिन्दू धर्म के बारे में जानती हैं,वो भारत नाट्यम सीखती है,वो इंडियन फेस्टिवल को बहुत चेरीस करती हैं। जैसे दिवाली के पीछे क्या मान्यता है होली वो या कोई भी भारतीय त्यौहार हो हम उसे यहाँ मनाते हैं। और में उसे हमेशा यह बताती हूं की फर्स्ट आना जरूरी नही है पार्टिसिपेट करना जरूरी है।

नेगेटिव चीजों को पॉजिटिव वे पर कैसे लेती हैं?

इस बात पर में यह कहना चाहूंगी कि आपने वो कहावत तो सुनी होगी जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि,आपका दृष्टिकोण सही है तो आप नेगेटिविटी को हटाकर जिंदगी में पॉजिटिविटी ला सकते है, हर चीज को पॉजिटिव नजरिए से देखना, कुछ बुरा हुआ तो ये समझ लेना कि इसके पीछे कुछ अच्छा होगा।

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-दिनेश जाला